जिले में इलेक्ट्रानिक ई कचरा दिनों दिन विकट समस्या बनता जा रहा है। विभिन्न सरकारी विभागों के अलावा निजी संस्थानों और घरों में इलेक्ट्रानिक उपकरणों में हर दिन नई तकनीक के चलन में आने से ई कचरे का ढेर बढ़ता जा रहा है। जिससे निपटना टेढ़ी खीर बनता जा रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत जहां जैविक और अजैविक कूड़े के निस्तारण के लिए तमाम तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं इलेक्ट्रानिक ई वेस्टेज के निस्तारण के लिए कहीं कोई भी ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है। जिस कारण सरकारी कार्यालयों, निजी प्रतिष्ठानों के अलावा घरों में भारी मात्रा में इलेक्ट्रानिक कचरा जमा हो रहा है।
गौरतलब है कि इलेक्ट्रानिक उपकरणों का लंबे समय तक प्रयोग करने के बाद नई तकनीक के तहत पुराने उपकरण के स्थान पर नए उपकरण का प्रयोग किया जाता है। लेकिन पुराने इलेक्ट्रानिक उपकरण को निष्प्रयोज्य रख दिया जाता है, जिसे ई वेस्ट कहा जाता है।
इन इलेक्ट्रानिक उपकरणों में कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैंड लाइन फोन, प्रिंटर्स, फोटो स्टेट मशीन, इंवर्टर, यूपीएस, एलसीडी, टेलीविजन, रेडियो, डिजिटल कैमरा आदि शामिल हैं। भारत संचार निगम लिमिटेड के अवर अभियंता हीरा बल्लभ पलसांई के अनुसार लोगों की बदलती जीवन शैली और बढ़ते शहरीकरण के चलते इलेक्ट्रानिक उपकरणों का ज्यादा प्रयोग होने लगा है मगर इससे पैदा होने वाले इलेक्ट्रानिक कचरे के दुष्परिणाम से आम आदमी बेखबर है।
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ.आरपी खंडूरी के अनुसार इलेक्ट्रानिक कचरे से निकलने वाले विभिन्न रासायनिक तत्व आंख, लीवर, किडनी आदि को प्रभावित करने के अलावा कैंसर, लकवा जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। ईवेस्ट से निकलने वाले जहरीले तत्व और गैसें मिट्टी और पानी में मिलकर उन्हें जमीन को बंजर और जहरीला बना देते हैं।
बीएसएनएल ई कचरे की रिसाइकलिंग कराएगा
सरकारी विभागों और प्राइवेट प्रतिष्ठानों में भले ही ई कचरे की रिसाइकलिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन वहीं भारत सरकार के उपक्रम बीएसएनएल की ओर से ई कचरे की रिसाइक्लिंग की जा रही है। बीएसएनएल की ओर से चलन से बाहर हो चुके लैंडलाइन फोन, ब्राडबैंड, डब्लूएलएल फोन और पुराने टेलीफोन एक्सचेंज में लगे इलेक्ट्रानिक उपकरणों को रिसाइकलिंग के लिए नीलाम किया जा रहा है।