सांसद आदर्श गांव रौलामेल शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहद पिछड़ा है। यह आदर्श गांव पढ़ाई के मामले में कतई आदर्श नहीं है। यहां पर दो प्राथमिक स्कूल और एक जूनियर हाइस्कूल तो है, लेकिन स्टाफ तीनों में आधा-अधूरा है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय भवन जर्जर हालत में है। इससे भी बदतर हाल यह कि गांव के बच्चों को आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए 12 किलोमीटर दूर पाटी जाना पड़ता है। आंगनबाड़ी केंद्र के लिए भूमि देने के बाद भी इसके लिए भवन नहीं बन सका है।
रौलामेल ग्राम पंचायत में दो प्राइमरी और एक जूनियर हाइस्कूल है। इनमें से दो जगह प्रधानाध्यापक के पद खाली हैं। प्राथमिक विद्यालय रौलामेल प्राइमरी स्कूल में 17, बड़ेत में सात और पूर्व माध्यमिक विद्यालय मैरोली में 20 छात्र हैं। बड़ेत और रौलामेेल प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद खाली हैं। मैरोली पूर्व माध्यमिक विद्यालय में तीन शिक्षक हैं। हिंदी के शिक्षक का पद खाली है। ग्रामीणों का कहना है कि गुणवत्ता की कमी के चलते छात्र-छात्राओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इसके चलते काफी लोग गांव से 12 किलोमीटर दूर पाटी में रहकर बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हो रहे हैं।
ग्रामीण लंबे समय से विद्यालय के उच्चीकरण और कन्या जूनियर हाइस्कूल की मांग करते रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। मैरोली पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन भी खतरे से खाली नहीं है। इस पुराना भवन की दीवारों में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। कक्षाओं के भीतर का हाल और बुरा है। ग्राम प्रधान रवीद्र लडवाल का कहना है कि एक साल पहले दो आंगनबाड़ी केंद्रों लड़ा और रौलामेल के लिए भूमि का स्थानांतरण विभाग को करने के बाद भी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं खुल सके हैं। फिलहाल यहां का आंगनबाड़ी केंद्र भी निजी भवनों में संचालित हो रहा है।
काेट
रौलामेल ग्राम पंचायत के तीनों स्कूलों में छात्र संख्या के हिसाब से शिक्षकों के पद हैं। अलबत्ता पूर्व माध्यमिक विद्यालय में एक शिक्षक और प्राइमरी में प्रधानाध्यापक के दो पदों को भरने के लिए प्रयास किए जाएंगे। स्कूल के भवन की मरम्मत का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। -सत्य नारायण, जिला शिक्षाधिकारी, चंपावत।
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सुधारी जाए शैक्षिक गुणवत्ता
पूर्व सैनिक सूबेदार श्याम सिंह का कहना है कि हम अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं। इससे बचने के लिए स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार जरूरी है।
सरकार ने फेरी है पीठ
ग्राम प्रधान रवींद्र लडवाल का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग करते-करते थक गए हैं लेकिन सरकारें इसकी अनदेखी कर रही हैं।
पलायन करने की मजबूरी
बुजुर्ग अम्मा दुर्गा देवी का कहना है कि चार साल पहले तक स्कूल में अच्छी पढ़ाई होती थी। तब बच्चे काफी थे। लेकिन अब पढ़ाई नहीं होने से काफी लोग गांव से दूर पाटी जाकर पढ़ाई करने को विवश हुए हैं।
बालिकाओं के लिए अलग स्कूल हो
सुमन लडवाल का कहना है कि बालिकाओं की शिक्षा की कोई अलग व्यवस्था नही है। 8वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए 12 किलोमीटर दूर ब्लाक मुख्यालय पाटी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यातायात की सुविधा नहीं होने से बालिकाओं को पैदल जाना पड़ता है।