दिल्ली अग्निकांड में रविवार को हुई 43 मजूदरों की मौत से पूर्व इस साल 24 मई को सूरत के एक कोचिंग सेंटर में लगी आग ने 20 विद्यार्थियों की जिंदगी ले ली थी। इन भीषण वारदातों के बावजूद स्कूलों के हालात में खास बदलाव नहीं आ सका है। स्कूलों में फाइबर छत का उपयोग तो नहीं हो रहा है लेकिन ज्यादातर स्कूलों में आग से बचाव के पुख्ता उपाय नहीं है। यहां तक कि आठ स्कूलों के पास ही फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र है।
जिले में कुल मिलाकर 897 स्कूल हैं। इन स्कूलों में 51 हजार छात्र-छात्राएं हैं। 85 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में आग के खतरों से बचाव के इंतजाम नगण्य हैं। स्कूलों तक सड़क नहीं होना अथवा संकरी सड़क में आपदा के वक्त फायरब्रिगेड के वाहन का न निकल पाना बड़ी चुनौती है।
लोहाघाट के प्रभारी अग्निशमन अधिकारी चंदन राम का कहना है कि पहाड़ में सिर्फ आठ स्कूल (उदयन इंटरनेशनल, माउंट कार्मल, गुरुकुलम, होली विजडम, ओपीएस, डीएवी, होली डॉन व सरस्वती एजुकेशन पब्लिक स्कूल) ने ही आग से बचाव का प्रमाणपत्र लिया है।
इधर सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि आग से बचाव को जरूरी कदम उठाने के शासन की ओर से कई बार निर्देश दिए गए लेकिन इन निर्देशों को अमली जामा पहनाने के लिए धन की कमी आड़े आ रही है। प्रधानाचार्यों की बैठक में इस पर चर्चा कर आग से बचाव के उपकरण के लिए कॉलेजों को प्रेरित करेंगे।
अग्निशमन केंद्र नहीं होने से भी बढ़ी समस्या
चंपावत। अग्निशमन केंद्र नहीं होने से चंपावत के स्कूलों में हालात और भी अधिक चिंताजनक हैं। बचाव के लिए 15 किमी दूर लोहाघाट फायर स्टेशन की सेवाएं लेने की मजबूरी है। अग्निशमन केंद्र नहीं होने से चंपावत में आग लगने पर 15 किमी दूर लोहाघाट से अग्निशमन वाहन आता है जिसके यहां पहुंचने में करीब 25 मिनट लग जाते हैं। एसपी धीरेंद्र गुंज्याल का कहना है कि चंपावत में अग्निशमन केंद्र का प्रस्ताव मुख्यालय में विचाराधीन है।
कोट
फायर सेफ्टी के लिए एक्सिटिंग्युस, बालू-रेता, पानी, फायर हुक आदि जरूरी है। साथ ही अग्नि सुरक्षा से संबंधित प्रमाणपत्र होना चाहिए लेकिन अधिकतर स्कूल इस अनिवार्यता को पूरा नहीं करते। इनमें से कई को नोटिस भेजा गया है। चंदन राम, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी, लोहाघाट।
टनकपुर लीसा अग्निकांड में हुआ था 10 करोड़ का नुकसान
चंपावत। क्षेत्र में कई भयंकर अग्निकांड पूर्व में हो चुके हैं। चंपावत की पुरानी बाजार में आग, टनकपुर फ्लोर मिल, 23 फरवरी 2007 को पोलिंग बूथ बने मौनपोखरी गेस्ट हाउस में आग की घटनाएं हो चुकी हैं। अप्रैल 2007 में टनकपुर लीसा डिपो में लगी भीषण आग में 37 हजार क्विंटल लीसा खाक हो गया था जिसमें 10 करोड़ का नुकसान हुआ। जून 2018 में चंपावत में डीएम का चैंबर भी खाक हो गया था।
2019 में चंपावत जिले में आग की घटनाएं
3 अप्रैल: पाटी में रसोई गैस लीक, मकान में लगी आग, घरेलू सामान जल कर खाक।
15 मई: चंपावत खड़ी बाजार में बेकरी में लगी आग, लाखों का नुकसान।
24 मई: लोहाघाट में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान में लगी आग, हजारों रुपयों का सामान जला।
27 सितंबर: पाटी के सिमलखेत में गैस सिलिंडर फटा, गृह स्वामी जख्मी।
26 अक्तूबर: लोहाघाट में एक घर में चाय बनाते वक्त गैस सिलिंडर में भड़की आग।