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अमर उजाला अभियान:दिगालीचौड़ आईटीआई में छात्र एक भी नहीं, कर्मी सात

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करिंये के भवन में संचालित होता आईटीआई दिगालीचौड़। - फोटो : LOHAGHAT
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नेपाल सीमा से लगे गुमदेश क्षेत्र के दिगालीचौड़ के आईटीआई का हाल सिस्टम पर तमाचा है। ग्रामीण क्षेत्र के इस आईटीआई में छात्र एक भी नहीं है लेकिन अनुदेशक और कर्मचारी सात हैं। जिस संस्थान से ग्रामीण नौजवानों को तकनीकी ज्ञान लेना है वह संस्थान 2018 से बंद है। जबकि 2011 में पहले सत्र में यहां 32 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे थे।
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लोहाघाट से 21 किमी दूर दिगालीचौड़ में 2011 में शुरू आईटीआई अभी भी किराये के भवन में है। संस्थान में दो ट्रेड इलैक्ट्रीशियन और फीटर मंजूर है। पहले सत्र में दोनों ट्रेडों में 16-16 छात्रों ने प्रवेश लिया था।
अनुदेशक की कुर्सी रिक्त होने से सितंबर 2016 से फीटर ट्रेड की पढ़ाई बंद है। 2018 से दूसरा ट्रेड इलैक्ट्रीशियन भी बंद हो गया है। जबकि इस वक्त यहां ड्राइंग एंड गणित के अनुदेशक सहित कुल सात कर्मी है। इन सात कर्मियों में से दो कर्मियों को दूसरी जगह संबद्ध किया गया है। चतुर्थ श्रेणी का कर्मी चंपावत और इलैक्ट्रीशियन अनुदेशक टनकपुर संबद्ध है।
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धन नहीं मिलने से अटका है काम
लोहाघाट (चंपावत)। दिगालीचौड़ में आईटीआई भवन का काम तो चार साल पहले शुरू हो गया था मगर निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। दिगालीचौड़ के मानाढुंगा में आईटीआई भवन निर्माण के लिए ग्रामीणों द्वारा दी गई 51 नाली भूमि में अब तक भवन निर्माण में 1.93 करोड रुपये खर्च हो चुके हैं।
4.50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस भवन के लिए आगे धन नहीं मिलने से पिछले साल से काम लटका हुआ है। सरपंच नवीन जोशी का कहना है कि अपना भवन नहीं होने से आईटीआई के विस्तार में अड़चन आ रही है। उन्होंने निर्माण का काम जल्द शुरू करने के लिए बजट मुहैया कराने की मांग की है।
छात्र नहीं होने से फिलहाल दिगालीचौड़ आईटीआई में कक्षाएं नहीं चल रही हैं। उम्मीद है कि इस बार सितंबर से शुरू शिक्षा सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। भवन निर्माण के लिए बजट की मांग की गई है।
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शांति मेहरा, प्रभारी, आईटीआई, दिगालीचौड़।
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