चंपावत। डेटा प्रोसेसिंग मिल्क केल्कुलेटिंग यूनिट (डीपीएमसीयू) लगने से दूध का उत्पादन घट गया है। चंपावत जिले की 30 दुग्ध समितियों में रोजाना औसतन 838 लीटर दूध का उत्पादन कम हो गया। अलबत्ता मशीन लगने के बाद दूध की गुणवत्ता सुधरी है और उत्पादकों को पांच रुपये प्रति लीटर अधिक दाम मिल रहे हैं।
चंपावत जिला दूध के उत्पादन के लिए मशहूर है। जनपद में 1.07 लाख से अधिक दुधारू मवेशी हैं। चंपावत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड जिलेभर की 189 दुग्ध समितियों के जरिये ग्रामीणों से 9 हजार लीटर से अधिक दूध का संग्रह करता है। दूध की गुणवत्ता और पारदर्शिता के मद्देनजर 2016 से अब तक दूध संग्रह करने वाली 30 समितियों में डीपीएमसीयू मशीन लगाई गई। इन मशीनों के लगने से पहले इन समितियों से रोजाना औसतन 4122 लीटर दूध एकत्र होता था। लेकिन मशीन लगने के बाद ये आंकड़ा कम होकर 3284.2 लीटर तक रह गया है। यानी इनमें रोजाना औसतन 838 लीटर दूध की मात्रा कम हो गई है। मशीन लगने के बाद दूध की गुणवत्ता में सुधार आया है। दूध की कीमत 20 रुपये से बढ़कर 25 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।
दुग्ध संघ का कहना है कि डीपीएमसीयू मशीन से दुग्ध उत्पादक फैट, सॉलिड नाट फैट (एसएनएफ), दूध की मात्रा और मिलने वाली कीमत तुरंत जान सकेगा। इसकी एक कंप्यूटराइज्ड स्लिप समिति में दूध बेचने वाले को दी जाती है। इस व्यवस्था से भले ही दूध की मात्रा में कमी आ रही हो, लेकिन गुणवत्ता बेहतर हो रही है। साथ ही पारदर्शिता और दूध का सही दाम उत्पादकों को मिल सकेगा।
इन समितियों में लगी है डीपीएमसीयू
खर्ककार्की, दूधपोखरा, फुलारगांव, मुड़ियानी, सीम, पल्सो, चौकी, लिस्ता, ललुवापानी, पुनावे, सुयालखर्क, डिंगडई, ककनौला, हरिपुरा, मगतोला, तपनीपाल, बायल, मानर, गौणी, बलाई, चौड़ाराजपुरा, डुंगरी फर्त्याल, पाटन, मोत्युराज, गल्लागांव, पऊ, चौबेगांव, सलना, गोसनी, बचखड़िया समिति।
कोट......
डीपीएमसीयू मशीन लगने के बाद दुग्ध समितियों का उत्पादन कम हुआ है। लेकिन गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इससे दूध की लागत करीब पांच रुपये प्रति लीटर अधिक मिल रही है। मशीन लगने के बाद दूध में पानी की मिलावट कम हुई। इस कारण उत्पादन की मात्रा में गिरावट आई है। लेकिन गुणवत्ता पहले से बेहतर हुई है।
राजेश मेहता, प्रबंधक, दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ समिति
वर्ष समितियां दैनिक दूध संग्रह (लीटर में)
2014-15 187 9097
2015-16 171 9690
2016-17 189 9576