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बिन बारिश नलों में आ रहा मटमैला पानी

Sat, 09 Mar 2019 11:17 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो  चंपावत।
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चंपावत में बिना बरसात के नलों से निकल रहा मटमैला पानी। - फोटो : अमर उजाला
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जिला मुख्यालय के लिए बहुप्रतीक्षित क्वैराला पेयजल योजना की उम्मीद तो फिलहाल इस साल पूरी होती नहीं दिख रही है लेकिन जल संस्थान की लचर कार्यप्रणाली के चलते नगरवासियों को बिना बरसात के गंदे पानी से प्यास बुझाने को मजबूरी होना पड़ रहा है। इस कारण नगर में पीलिया, डायरिया और कालरा जैसे संक्रामक रोगों के पांव पसारने का खतरा बढ़ गया है।

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वर्तमान में जिला मुख्यालय को ललुवापानी, रौखेत, दुधौरी और छीड़ापानी आदि क्षेत्रों के स्रोतों से पेयजल आपूर्ति होती है। बरसात में तो नलों में गंदा पानी आता ही है क्योंकि अधिकतर पेयजल योजनाओं में फिल्टर सिस्टम महज दिखावे भर के हैं और वे कार्य नहीं करते हैं। जबकि हर साल इनकी मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये व्यय होते हैं।

इस बार समस्या बेहद गंभीर है। बिना बारिश के ललुवापानी और रौखेत स्रोत से सप्लाई होने वाले मल्लीहाट, तल्लीहाट, मेलाकोट, भेट्टी, भैरवां, शांत बाजार, पिथौरागढ़ रोड, जीआईसी, कनलगांव, मादली, त्यारकूडा आदि इलाकों में चार दिन से लगातार गंदा पानी आ रहा है।
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भाजपा के वरिष्ठ नेता शंकर दत्त पांडेय ने इस बारे में दूरभाष पर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को व्यवस्था ठीक कर शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को कहा है।
शांत बाजार और पिथौरागढ़ मार्ग के हिस्से में लंबे समय से नलों में गंदा पानी आ रहा है। पीने के लिए बाजार से पानी की बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं। सुरेश जोशी, दुकानदार। फोटो 09 सीपीटी 09 पी।

दो दिनों से नल में गंदा पानी आ रहा है। कल दोपहर बाल्टी में रखा साफ पानी गिराकर ताजा भरने को सोचा तो देखा नल में गंदा पानी आ रहा है। फिर हैंडपंप से पानी लाना पड़ा। इस बार तो बिना बारिश के गंदा पानी आ रहा है। पूरन पांडेय, जीआईसी चौक। 

नगर क्षेत्र में नलों में गंदा पानी आने की समस्या वर्षों से बनी हुई है। विभागीय अधिकारियों को जानकारी देने के बाद भी समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है। आज तो ऐसा पानी आया कि उसका इस्तेमाल ही नहीं हो सकता है। विकास साह, मल्लीहाट। 

पानी का बिल लगातार बढ़ रहा है लेकिन साफ पानी मिलना टेढ़ी खीर बना है। पहले तो बारिश में गंदा पानी आता था अब तो बिना बारिश के गंदा पानी आ रहा है। फिर गर्मी में स्रोत घटने से नल सूख जाएंगे। पानी का बिल घटेगा नहीं सिर्फ बढ़ेगा। मोहन खाती, तल्ली मादली। 

दूषित पेयजल से पीलिया, डायरिया और कालरा जैसे संक्रामक रोग होने की ज्यादा संभावना रहती है। इस कारण बरसात और गर्मी में दूषित जल से रोगियों की तादाद में इजाफा हो जाता है। आजकल भी अधिकतर बीमारियों की वजह गंदा पानी है।
डॉ. डीएन तिवारी, पूर्व प्रभारी चिकित्साधिकारी।

नलों में इन दिनों गंदा और मटमैला पानी आने का कारण ललुवापानी और रौखेत के स्रोतों के ऊपर कटान की मिट्टी फेंकना बताया जा रहा है। मेरी ओर से पेयजल लाइन का निरीक्षण कर समस्या को दूर करने के उपाय किए जाएंगे जिससे साफ पानी की आपूर्ति हो सके।
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केसी पंत, जेई, जल संस्थान। सतीश जोशी

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