सिन्याड़ी, सूखीढांग, देवीधुरा, भिंगराड़ा ये बेहद छोटे-छोटे गांव हैं। इन गांवों में एक समानता है। इन इलाकों में दारू तो उपलब्ध है, लेकिन दवा नहीं। स्वास्थ्य सुविधा की कमी से इन गांवों के लोगों को मामूली इलाज के लिए भी करीब 51 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है।
चंपावत ब्लॉक के सिन्याड़ी, सूखीढांग, पाटी ब्लॉक के देवीधुरा, भिंगराड़ा में शराब सुलभ है। विडंबना यह है इन जगहों में ग्रामीण इलाज को तरस रहे हैं। मां बाराही धाम देवीधुरा और भिंगराड़ा में तो अस्पताल होने के बावजूद डॉक्टरों की कमी से उपचार नहीं मिल रहा है। इन इलाकों के लोग छोटे से मर्ज के लिए भी लोहाघाट, चंपावत और टनकपुर के अस्पतालों में जाने को मजबूर है। इन गांवों से अस्पतालों का फासला 30 किलोमीटर से 51 किलोमीटर तक है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां से दूर के अस्पतालों में आवाजाही में वक्त और धन की बर्बादी होती है। खिलानंद जोशी सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि शराब की दुकानों के बजाय स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। विधानसभा चुनाव में वोट मांगने आने वाले नेताओं के सम्मुख भी यह मामला उठाया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि शराब की दुकानें एक तरफ तो शराबखोरी की प्रवृत्ति बढ़ा रही हैं, वहीं नौजवानों की फिटनेस पर भी मार कर रही है। नशे के गिरफ्त में आकर युवाओं की फौज और अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती भी कम हो पा रही है।
इलाज पर असर डाल रही डॉक्टरों की कमी
जिले में डॉक्टरों की भारी कमी है। देवीधुरा सहित आठ अस्पतालों में एक भी डॉक्टर नहीं है। सीएमओ डॉ. डीएल साह का कहना है कि डॉक्टरों की कमी से कई अस्पताल डॉक्टर विहीन हो गए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही है।
साल भर में 130 करोड़ की शराब गटक जाते हैं लोग
प्रदेश के सबसे छोटे जिलों में से एक है चंपावत। लेकिन यहां शराब से राजस्व खूब मिलता है। साल भर में 33.5 करोड़ रुपए का राजस्व मिल रहा है। जिले में देशी व विदेशी शराब मिलाकर कुल 16 दुकानें हैं। जहां हर रोज औसतन करीब 8 हजार बोतल शराब की बिक्री है। सालभर में 130 करोड़ रुपये से अधिक की शराब की बिक्री होती है।