एक बच्ची को रक्तदान कर उसकी जान बचाने से ऐसी प्रेरणा मिली कि एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी के एसोसिएट प्रोफेसर डा. आनंद सिंह उनियाल ने लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना अपने उद्देश्य बना लिया। डा. उनियाल न सिर्फ खुद 15 साल में 76 बार रक्तदान कर चुके हैं, बल्कि अब तक वे तीन लाख युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित भी कर चुके हैं।
मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के सल्ट निवासी डा. उनियाल से हुई विशेष वार्ता में उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में उन्होंने हल्द्वानी के अस्पताल में भर्ती चंपावत की एक ऐसी बच्ची को रक्तदान किया जो रक्त न मिलने पर दम तोड़ सकती थी। उसकी जान बचने से उन्हें अद्भुुत आत्मसंतुष्टि मिली। शुक्रिया जताने को बच्ची के परिजनों के बार-बार आने वाले फोन ने उन्हें रक्तदान की प्रेरणा दी। इसके बाद उन्होंने अस्पतालों में जाकर जरूरतमंदों को रक्तदान करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि एक दिन में साढ़े तीन हजार यूनिट ब्लड एकत्र कराने का उनका रिकार्ड है और वे 500 रक्तदान दाता बना चुके हैं।
उनका कहना है कि हमारे शरीर में खून ही एक ऐसी चीज है, जिसे बार-बार दान कर दूसरों की जान बचाई जा सकती है। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति 90 दिन के बाद फिर से रक्तदान कर सकता है। डा. उनियाल राज्य में स्पर्श गंगा अभियान, संवेदना अभियान, हरित उत्तराखंड से हरित भारत, मतदाता जागरूकता अभियान, पर्यावरण संरक्षण अभियान भी चला रहे हैं। इसके अलावा डा. उनियाल ने केदारनाथ में आई आपदा के वक्त 46 लाख रुपये एकत्र कर आपदा राहत कोष में भेजे थे।