श्रीरीठा साहिब की प्रसिद्धि गुरुद्वारे से है। देश ही नहीं दुनियाभर में सिक्ख समाज के लिए पवित्र यह इलाका स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से पिछड़ा है। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो है लेकिन इलाज के लिए डॉक्टर नहीं है। अस्पताल में मरीजों की नब्ज टटोलने से लेकर दवा देने तक का जिम्मा फार्मेसिस्ट के कंधों पर है और वे ही यहां के मरीजों के लिए बचीखुची आस भी हैं।
चंपावत से 75 किमी दूर श्री रीठासाहिब का अस्पताल लोगों की उम्मीद से इंसाफ नहीं कर पा रहा है। अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को इस अस्पताल का जायजा लिया, तो हालात माथे की लकीर को गहराने वाले थे। संविदा पर एक डॉक्टर तैनात हैं लेकिन वे जून से छुट्टी पर हैं। मरीजों के चेहरों पर मुस्कान लाने का जिम्मा फार्मेसिस्ट का है। अस्पताल में फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी ड्यूटी पर मुस्तैद थे। वे ही मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बने हैं। अस्पताल में औसतन 400 मरीज प्रति माह देखे जा रहे हैं। श्री रीठा साहिब के इस अस्पताल में इलाज के नाम पर किसी तरह की जांच की सुुविधा नहीं है। प्राथमिक इलाज को तरस रहे यहां के लोगों के लिए अधिकांश मरीजों को आपात चिकित्सा सेवा 108 के तहत लोहाघाट और चंपावत लाना नियति है।
शुक्रवार को अस्पताल में नहीं मिलती दवा
चंपावत। श्रीरीठा साहिब के डॉक्टर तो छुट्टी पर हैं ही। श्रीरीठा साहिब से 16 किमी पैदल दूरी पर स्थित मंगललेख एएनएम केंद्र भी खाली है। इसकी मार श्रीरीठा के अस्पताल पर पड़ रही है। यहां के फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी को हर शुक्रवार को मंगललेख जाने के आदेश है। इसके अनुपालन में शुक्रवार को श्री रीठा साहिब अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं है।