चंपावत जिला अस्पताल में तैनात डॉ. राजेश गुप्ता। (फाइल फोटो)
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मैं रविवार शाम तक जरूर पहुचूंगा बॉस। महज 24 घंटे पहले की ही बात थी चंपावत जिला अस्पताल के डॉक्टर राजेश गुप्ता ने मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी से फोन पर यह आखिरी वाक्य कहा था।
दरअसल डॉ. गुप्ता 3 फरवरी से अवकाश में थे और सोमवार सुबह उन्हें आना था। सीएमएस ने फोन पर ही उन्हें सोमवार को अस्पताल के बजाय पुलिस लाइन में लगने वाले कैंप में स्वास्थ्य परीक्षण का जिम्मा सौंपा था। पर डॉ. गुप्ता अब कभी न अस्पताल आ सकेंगे और नहीं मरीजों का इलाज कर सकेंगे। सीएमएस डॉ. जोशी ने रविवार करीब दो बजे डॉ. गुप्ता की मौत की खबर सुनी, तो वे अवाक रह गए।
सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. गुप्ता अक्तूबर 2014 में मोटाहल्दू से चंपावत जिले में भेजे गए थे। मार्च 2015 तक वे लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्साधीक्षक रहे। इसके बाद से वे लगातार जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक के रूप में सेवा दे रहे थेे। साथी डॉक्टर बताते हैं कि बीते कुछ वक्त से वे परेशान नजर आते थे, लेकिन अपनी दिक्कतों को किसी के साथ सांझा नहीं करते थे। इसी के चलते छह माह में वे कई बार अवकाश में रहे। पैथोलॉजिस्ट डॉ. सुषमा नेगी के यहां से खटीमा स्थानांतरण होने के मौके पर पिछले माह हुए कार्यक्रम में उन्होंने जरूर शिरकत की, अन्यथा वे अस्पताल के अलावा चुपचाप रहते थेे।
चंपावत में वे सेवानिवृत्त खंड शिक्षाधिकारी टीआर टम्टा के भवन में किराए में रहते थे। उनके पड़ोसी और नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले शिक्षक सामश्रवा आर्य बताते हैं कि कुछ हफ्ते पूर्व उन्होंने अपनी परेशानी और बैचेनी की बात कही। बताते हैं कि हल्द्वानी में रहने वाले परिवार की फिक्र का कई बार जिक्र किया। शिक्षक आर्य का कहना है कि नींद के लिए वे उनसे योग व प्राणायम की जानकारी लेते थे।
शोक में आज बंद रहेगा जिला अस्पताल
चंपावत। अपने साथी डॉक्टर राजेश गुप्ता की मौत पर चंपावत जिला अस्पताल में सोमवार को शोक रहेगा। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी ने बताया कि श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद अस्पताल की ओपीडी (वाह्य रोग विभाग) बंद रहेगा। सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही सुचारू रहेंगी।