डायनमिक एश्योर्ड कॅरियर प्रमोशन (डीएसीपी) की मांग को लेकर प्रांतीय चिकित्सक सेवा संघ (पीएमएस) के तेवर तीखे बने हैं। इसे लेकर दो घंटे का कार्य बहिष्कार जारी है। मंगलवार को भी डॉक्टरों ने विरोध जारी रखा। इसके चलते यहां मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, अब सरकारी अस्पताल के डॉक्टर 12 फरवरी से पूर्ण कार्य बहिष्कार करेंगे। पूर्ण कार्य बहिष्कार अवधि में सिर्फ आपात सेवा और पोस्टमार्टम की सेवा जारी रहेगी।
संघ के पदाधिकारी डा.आरके जोशी का कहना है कि डीएसीपी की मांग को 2015 से लागू करने के आदेश से पुराने डॉक्टरों के साथ नाइंसाफी हो रही है। उन्हें न तो पदोन्नति मिल पा रही है, और न आर्थिक लाभ हो रहा है। विभागीय पदोन्नति कमेटी (डीपीसी) भी नियमित रूप से नहीं बैठ रही है, जिस कारण कई जिलों में सीनियर डॉक्टरों के बजाय कनिष्ठ डॉक्टरों को मुख्य चिकित्साधिकारी का जिम्मा दिया गया है। कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन में सीएमएस डा.एसबी ओली, डा.आरपी खंडूरी, डा.उदय शंकर, डा.सुषमा नेगी, डा.मेघा गुप्ता आदि डॉक्टर शामिल थे।