चंपावत में समाज कल्याण कार्यालय में बेटे की पेंशन के बारे में पूछताछ करती बुजुर्ग बसंती देवी।
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बेटे की पेंशन के लिए एक बुजुर्ग मां बैंक से लेकर विभाग के लगातार चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं है। शुक्रवार को भरी दोपहर में भी यह बुजुर्ग महिला समाज कल्याण विभाग कार्यालय पहुंची। कुर्सी में बैठकर काम कर रहे एक कर्मचारी से पूछा।
बाबूजी मेरे बेटे की पेंशन कब तक आएगी। जवाब नहीं मिलने पर वह बुजुर्ग महिला विभाग के कर्मचारी की कुर्सी के पास जमीन पर बैठकर गुजारिश करने लगी। पेंशन प्रकरण को देख रहे बाबू शिवदत्त जोशी बताते हैं कि विभाग ने बुजुर्ग महिला के बेटे की पेंशन 15 अप्रैल को बैंक में कलेक्शन के लिए भेज दी थी, लेकिन 14 दिन बाद भी लाभार्थी की पेंशन उसके खाते में जमा नहीं हो सकी है, जबकि विकास भवन से बैंक की दूरी महज चार किमी से भी कम है।
35 प्रतिशत दिव्यांग होने पर जिला मुख्यालय से चार किमी दूर कमैला गांव निवासी गणेश दत्त को राज्य सरकार की ओर से तीलू रौतेली पेंशन दी जाती है, लेकिन छह माह से उसे यह पेंशन नहीं मिली है। उसकी पेंशन लेने को उसकी 65 वर्षीय मां बसंती देवी शुक्रवार को समाज कल्याण कार्यालय पहुंचीं। इससे पहले बसंती देवी ने पहले भारतीय स्टेट बैंक में बेटे की पेंशन के लिए गुहार लगाई। निराश बसंती देवी को विभागीय कर्मियों ने बताया कि गणेश दत्त समेत अन्य लाभार्थियों की पेंशन 15 अप्रैल को खाते में जमा करने के लिए बैंक में भेज दी है, लेकिन महज चार किमी दूर से आने वाली पेंशन 14 दिन के बाद भी खाते में जमा क्यों नहीं हो सकी है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी पीसी जोशी का कहना है कि ऑनलाइन पेंशन तो तत्काल लाभार्थी के खाते में जमा हो जाती है, लेकिन नेफ्ट के जरिए जमा होने वाली पेंशन देरी से लाभार्थी के खाते में जमा होती है। इसकी वजह यह है कि सॉफ्टवेयर एक दिन में अधिकतम 40 लोगों की ही पेंशन जमा करने में सक्षम होता है।