पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल प्रबंध समिति की बैठक में व्यवस्थाओं पर असंतोष और नाराजगी जताते हुए उसमें सुधार के लिए एक माह का समय दिया गया। अध्यक्षता करते हुए सीडीओ एसएस पांगती ने जहां 14 माह बाद बैठक करने पर रोष जताया, वहीं उन्होंने रोगियों को बेहतर सेवा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए।
सीएमओ डा.विनोद टोलिया ने कहा कि रोगियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवा देने के लिए ही इसे पीपीपी मोड में दिया गया है, जहां रोगियों की उपेक्षा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बताया गया कि अस्पताल में 30 सितंबर 2014 की तुलना में 30 सितंबर 2015 तक रोगियों की तादात में 20419 की कमी आई है।
बैठक में बाजार से दवाएं मंगाने से पहले सीएमएस और फार्मेसिस्ट मनोज की अनुमति लेना अनिवार्य किया गया। गर्भवती महिलाओं को शीघ्र अल्ट्रासाउंड की निशुल्क व्यवस्था उपलब्ध कराने, अस्पताल भवन को साफ-सुथरा एवं उसमें रंगरोगन करने, रोगियों को मडुंवा, भट आदि के व्यंजन परोसने, एक दर्जन अतिरिक्त बेडों की व्यवस्था, तीमारदारों के लिए अलग से बाहर शौचालय बनाने, अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगाने के साथ आंगन में पक्का फर्श लगाने, ठप पड़े सोलर रूम हीटर को चालू करने का निर्णय लिया गया।
वरिष्ठ चिकित्सक डा.राजेश गुप्ता ने अस्पताल में जबरन जांच कराने का विरोध किया। साथ ही इसका रिकार्ड रखने का सुझाव दिया। प्रबंध समिति की लेखा व्यवस्था का कार्य एलडी जोशी को सौंपा गया। यूनिट हैड डा.रवि सिन्हा ने व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन दिया। बैठक में सीएमएस डा.फरीद, डा.आरके गुप्ता, एसटीओ एससी पांडेय, नवीन मुरारी, बीडीओ केएस नयाल आदि थे।
सीएमओ ने पहली बार किया निरीक्षण
अस्पताल में पहली बार आए सीएमओ डा.विनोद टोलिया ने सबसे पहले भर्ती रोगियों का हालचाल जाना। रोगियों ने बताया कि सारी दवाएं बाजार से मंगाई जा रही हैं तथा उन्हें अस्पताल की ओर से भोजन नहीं मिलता है। सीएमओ ने अस्पताल कालोनी में अवैध रूप से रह रहे लोगों को बाहर करने तथा अवैध पेयजल कनेक्शन काटने के साथ ही यहां की पेयजल व्यवस्था सुचारु करने के निर्देश दिए।