हाइकोर्ट की ओर से पहली बार पॉलिथीन बनाने वाली इकाइयों पर कठोर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद जगी है कि चंपावत जिले में पॉलिथीन का प्रयोग पूर्ण रूप से खत्म होगा। दरअसल जिले के पहाड़ी हिस्से में मैदानी क्षेत्रों से डिस्पोजेबल के नाम पर कचरा भेजा जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र में कहीं भी पॉलिथीन और थर्माकोल का निर्माण नहीं किया जाता है।अधिकांश लोगों का कहना है कि पॉलिथीन का प्रयोग पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक है, ऐसे में स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों को हाइकोर्ट के निर्देश कड़ाई से लागू करने चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही आश संस्था के निदेशक कैलाश तलनियां कहते हैं कि जब पॉलिथीन का निर्माण ही नहीं होगा वह उपयोग में कैसे आ सकता है। ऐसे में सबसे पहले किसी न किसी रूप में पॉलिथीन का उत्पादन करने वाले उद्योगों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। वहीं, पर्यावरणविद प्रकाश चंद्र जोशी कहते हैं कि गांव घरों में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में पॉलिथीन और थर्माकोल का अब भी प्रयोग किया जा रहा है। आखिर जब यह सामग्री प्रतिबंधित है तो उसका निर्माण कहां हो रहा है, यह जांच का विषय है।
हर घर के दस मीटर दायरे में पॉलिथीन का कब्जा
जिला मुख्यालय के हर घर के दस दस मीटर के दायरे में पॉलिथीन ने कब्जा जमा लिया है। पानी की बोतल, टाफी, बिस्कुट, गुटखा, शैंपू, दूध की थैलियों के रूप में पॉलिथीन ही पॉलिथीन फैली हुई है। नगरीय इलाकों को छोड़ भी दिया जाए तो ग्रामीण इलाकों में भी यही स्थिति है। उपजाऊ खेतों में पॉलिथीन के पहुंचने से खेतों की उर्वरा शक्ति समाप्त हो गई है। हालांकि पूर्व में कोर्ट के निर्देश पर गुटखा और अन्य पाउचों में बिकने वाली सामग्री कागज की थैलियों में आने लगी थी। लेकिन कुछ ही समय बाद सभी पाउच पूर्व की तरह ही बिकने लगे हैं।
अधिकांश दुकानों में लगे पॉलिथीन न मांगने के पर्चे
जिले के पर्वतीय क्षेत्र की अधिकांश दुकानों में दुकानदारों की ओर से पॉलिथीन न मांगने के पर्चे लगा दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से छापेमारी भी की जा रही है, लेकिन इसके बाद भी ग्रामीण कस्बाई इलाकों में पॉलिथीन का धड़ल्ले से प्रयोग जारी है।
लोहाघाट में धड़ल्ले से चल रही पॉलिथीन
हाइकोर्ट द्वारा पॉलिथीन और डिस्पोजेबल सामग्री पर रोक लगाए जाने के बावजूद क्षेत्र में धड़ल्ले से इसका इस्तेमाल हो रहा है। नगर पंचायत और प्रशासन के सुस्त रवैये के चलते पॉलिथीन के प्रयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है। कूड़े के ढेरों में भी पॉलिथीन जगह-जगह बिखरी पड़ी है। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत और प्रशासन द्वारा समय-समय पर खानापूर्ति के लिए पॉलिथीन के खिलाफ अभियान जरूर चलाया जाता है, मगर कुछ ही वक्त में ये अभियान ठंडा पड़ जाता है। नगर पंचायत के ईओ अभिनव कुमार का कहना है कि पूर्व में समय-समय पर पॉलिथीन और डिस्पोजेबल सामग्री के खिलाफ अभियान चलाकर 12500 रुपए अर्थदंड के रूप में वसूले गए हैं। ईओ का कहना है कि शीघ्र ही वृहद अभियान चलाकर पॉलिथीन का प्रयोग करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।