खिरद्वारी गांव के विस्थापन की मांग
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टनकपुर (चंपावत)। आदिम जनजाति वन रावत बाहुल्य खिरद्वारी में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। सदियों से अनदेखी का दंश झेल रहे खिरद्वारी निवासी अनुसूचित जनजाति के ग्रामीणों ने मंगलवार को एसडीएम अनिल चन्याल को ज्ञापन सौंपा। इसमें जल्द विस्थापन करवाने की मांग की।
बीडीसी सदस्य रेखा पांडेय के नेतृत्व में एसडीएम से मिले ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम पंचायत पोथ का तोक खिरद्वारी गांव विकास के लिहाज से खासा पिछड़ा है। गांव के 23 परिवारों में करीब 150 लोग रहते हैं। प्रधान के पास जाने के लिए भी चार किमी चलना पड़ता है। गांव तक जाने के लिए न तो सड़क है, न बिजली और न ही पेयजल योजना। ग्रामीणों ने सोलर लाइट ली है। उसकी भी मरम्मत तक नहीं हो पाती।
सड़क तक पहुंचने के लिए उन्हें न सिर्फ 18 से 20 किमी पैदल चलना पड़ता है, बल्कि रास्ते में पड़ने वाले 12 से ज्यादा बरसाती नालों को पार करते समय भी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। प्रधान के घर पोथ जाने के लिए भी चार किमी चलना पड़ता है। उन्होंने वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र भेज विस्थापन की गुहार लगाई, लेकिन शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। ज्ञापन देने वालों में पूर्व बीडीसी सदस्य, पूर्णागिरि मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय, जोत सिंह, लक्ष्मी देवी, कौशल्या देवी, सरस्वती देवी, माना देवी, चंद्र देवी आदि थे।