टनकपुर/बनबसा (चंपावत)। इस बार रोग लगने से धान की फसल खराब होने की कगार पर पहुंच गई है। धान की फसल पीली पड़ने के साथ ही पौधा बौना हो रहा है जिसमें बालियां आने की संभावना नहीं के बराबर है। अगर ऐसा हुआ तो क्षेत्र में धान का उत्पादन काफी कम होगा। वहीं किसानों ने सरकार एवं प्रशासन से बीमारी का इलाज कराने और पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
क्षेत्र के किसानों ने बताया कि इस बार धान की फसल में नया रोग लगा है। टनकपुर, बनबसा में सवा सौ से अधिक किसानों ने अपने खेतों में खड़ी फसल में नया रोग लगने की बात बताई है। टनकपुर में आमबाग, बिचई, सैलानीगोठ, मनिहारगोठ, ककरालीगेट क्षेत्रों के किसान खड़क चंद, हरीश चंद, सतीश चंद, सुरेश चंद, देव चंद, हरि प्रसाद, महेंद्र चंद, ललित चंद, त्रिलोक चंद्र पुनेठा, शेरी चंद, भुवन चंद, चंद्रमोहन जोशी, बसंतराज चंद, खीमराज चंद, प्रवीन चंद गणेश चंद, पुष्कर सिंह ने बताया कि नए रोग से धान की फसल नष्ट हो रही है।
वहीं बनबसा में चंदनी, भजनपुर, देशीफार्म, चंदफार्म, गढ़ीगोठ, पचपकरिया, देशीफार्म आदि में धान की फसल खराब हो रही है। बनबसा निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन वीरेंद्र रजवार ने बताया कि फटेरा एवं विफरोनिल के घोल के छिड़काव से फसल का बौनापन समाप्त हो रहा है लेकिन उसमें बालियां आएंगी कि नहीं यह कहना मुश्किल है। सेवानिवृत्त कैप्टन हरीश कापड़ी ने बताया कि ढाई-ढाई किलो डाया एवं यूरिया में ढाई सौ ग्राम जिंक मिलाकर छिड़कने से भी फसल को बचाया जा सकता है लेकिन यह कितना कारगर होगा कुछ कहा नहीं जा सकता।
नया रोग लगने से खराब हो रही धान की फसल की कृषि वैज्ञानिकों ने जांच कर सैंपल लिए हैं। जांच रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा कि नया रोग क्या है और उसका उपचार कैसे होगा। फिलहाल प्रशासन एवं फसल बीमा के तहत बीमा अधिकारियों ने भी खेतों में खड़ी फसल का जायजा लिया है। नए रोग को वायरल कहा जा रहा है, जिसे हरियाणा, पंजाब और दिल्ली से फैलना बताया जा रहा है। -गोपाल सिंह भंडारी, मुख्य जिला कृषि अधिकारी चंपावत।