चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। नेपाल सीमा के पास का बगोटी बस नाम का डिजिटल गांव है। मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत की वजह से जिले के इस पहले डिजिटल गांव के हाल बुरे हैं। गांव के लोगों का तो कम से कम ऐसा ही मानना है। ऑनलाइन काम होना तो दूर, यहां सामान्य नेटवर्क के भी ठीक से काम नहीं करने से फोन पर बात करना भी आसान नहीं है।
जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर बगोटी गांव को अप्रैल 2019 को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय की डिजिटल ग्राम योजना के तहत जिले का पहला डिजिटल गांव घोषित किया गया था। इसके तहत लोगों को बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऑनलाइन आवेदन आदि सुविधाएं दी जानी हैं।
446 की आबादी वाले इस गांव के एक बरातघर में सीएससी (जन सेवा केंद्र) का एक बोर्ड लगा दिया गया लेकिन मोबाइल सिग्नल की कमी से डिजिटल गांव की सुविधा रत्तीभर भी नहीं मिल रही है। डिजिटल गांव के क्रियान्वयन में सीएससी की मुख्य भूमिका थी लेकिन वह भी अब बंद हो गया है। इन्समय यहां छिटपुट जगह ही मोबाइल सिग्नल मिल पाते हैं। संवाद
डिजिटल गांव में ई-सुविधा से होने हैं सभी काम
डिजिटल गांव घोषित होने के बाद बगोटी में मुख्य काम इलेक्ट्राॅनिक तरीके से होने चाहिए। ग्रामीणों को पानी-बिजली के बिल जमा करने, आयुष्मान कार्ड बनाने, सेवायोजन पंजीकरण, तहसील से जारी होने वाले प्रमाणपत्रों के अलावा कैशलेस सिस्टम, नेट बैंकिग, विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर, टेबलेट की सुविधा और गांव में फ्री वाईफाई आदि सुविधा मिलनी चाहिए।
डिजिटल गांव में मिलेगी ये सुविधाएं
भीम एप, ई-वॉलेट सहित तमाम तरह के ट्रांजिक्शन।
ई-बुक, ऑनलाइन टेली मेडिसिन, टेलीपैथी की सुविधा।
10 दिन के नि:शुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण के जरिए 14 से 60 साल तक के लोगों को डिजिटल साक्षर करना।
डिजिटल गांव की घोषणा जरूर हुई। साइन बोर्ड भी लगा लेकिन डिजिटल गांव जैसा यहां कुछ नहीं है। इसकी वजह यहां लचर मोबाइल नेटवर्क होना है। कुछ समय से यहां का सीएससी भी काम नहीं कर रहा है। - दीपा देवी, ग्राम प्रधान, बगोटी।
डिजिटल गांव बगोटी के मोबाइल नेटवर्क को बेहतर किया जा रहा है। बीएसएनएल का मोबाइल टावर लग रहा है। वर्ष 2024 के शुरू में बीएसएनएल ये काम पूरा कर लेगा। इसके बाद सभी अनुमन्य सुविधाएं बेहतर तरीके से मिलेंगी। - अशोक अधिकारी, बीडीओ, लोहाघाट।