सप्तेश्वर परियोजना का परीक्षण करते ऊर्जा निगम के जेई आरसी पंत।
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चंपावत। चंपावत जिले में दो गांव मॉडल ऊर्जा दक्ष गांव के रूप में विकसित किए जाएंगे। इन गांवों के सभी परिवारों के घरों के बिजली उपकरणों को बदल निशुल्क स्मार्ट उपकरण दिए जाएंगे। इससे बिजली की खपत कम होने के साथ लोग भी जागरूक हो सकेंगे।
चंपावत ब्लाक के धूरा और लोहाघाट के बनगांव एक साल के भीतर मॉडल ऊर्जा दक्ष गांव बन जाएंगे। उरेडा के परियोजना अधिकारी मनोज बजेठा ने बताया कि इन दोनों गांवों का चयन कर लिया गया है। डीपीआर बनाने के बाद ऊर्जा ऑडिट किया जाएगा। दोनों गांवों के सभी घरों के बिजली उपकरण बदल कर स्मार्ट उपकरण लगाए जाएंगे। ज्यादातर स्मार्ट उपकरण एलईडी आधारित होंगे। बताया गया कि उपकरण बदलने से 85 प्रतिशत तक बिजली की बचत हो सकेगी। बिजली का कम बिल आने के साथ अन्य लोग भी इस योजना से बिजली बचत अपनाने को जागरूक होंगे।
दस साल बाद फिर शुरू होगी सप्तेश्वर लघु जल बिजली परियोजना
चंपावत। दस साल तक बंद सप्तेश्वर लघु जल बिजली परियोजना के अच्छे दिन आएंगे। यह परियोजना एक हफ्ते के भीतर फिर से उत्पादन करेगी। अधिकारियों ने मुआयना कर परियोजना को शुरू करने से संबंधित सभी काम पूरा कर लिया है।
सिप्टी क्षेत्र में 1990 में सप्तेश्वर में 300 किलोवाट क्षमता की लघु बिजली परियोजना शुरू की गई थी। इससे बिजली की आपूर्ति सिप्टी के आसपास के गांवों में की जाती थी। लेकिन दस साल से उपकरण खराब होने से ये परियोजना बंद थी। उरेडा के पीओ मनोज बजेठा ने बताया कि तीन साल पहले विभाग ने इसे शुरू करने की कवायद की थी। अब यह लघु जल बिजली परियोजना पूरी हो गई है। उपकरणों को ठीक करने के साथ जनरेटर लगा दिए गए हैं। इस उत्पादित बिजली को अगले हफ्ते से ऊर्जा निगम को दिया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र के एक फीडर को बिजली की भरपाई होने के अलावा चार लोगों को रोजगार भी मिलेगा। परियोजना से बिजली लेने से पूर्व ऊर्जा निगम के एई विकास भारती, जेई आरसी पंत ने उरेडा अधिकारियों के साथ मुआयना किया।