मानेश्वर के भरछाना में चल रही श्रीराम कथा का वाचन करते व्यास राकेश डुकलान। संवाद
लोहाघाट (चंंपावत)। भरछाना के राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा के अंतिम दिन भरत मिलाप का प्रसंग सुनाया गया। बुधवार को कथावाचक व्यास पंडित डुकलान ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि ननिहाल से अयोध्या लौटने पर जब भरत को पता चला कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास पर चले गए हैं, तो वह गहरे दुख में डूब गए। उन्होंने अपने पिता महाराज दशरथ का अंतिम संस्कार किया और गुरु वशिष्ठ, माताओं और अयोध्या के समाज के साथ श्रीराम को वापस लाने के लिए वन की ओर प्रस्थान की कथा का प्रसंग सुनाया। मुख्य आयोजक ज्योतिषाचार्य पंडित रेवाधर कलौनी, उनकी धर्मपत्नी जानकी देवी, जगदीश चंद्र कलौनी, पुरोहित दीपक कुलेठा, नारायण दत्त पुनेठा, नारायण दत्त कलौनी, कृष्णानंद कलौनी, गिरीश चंद्र कलौनी, डाॅ. सतीश चंद्र पांडेय, मोहित पाठक, योगेश मेहता, विजय वर्मा आदि मौजूद रहे। संवाद