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Champawat News: देवीधुरा बना रणभूमि, आठ मिनट की बगवाल में 183 घायल

Sat, 09 Aug 2025 10:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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देवीधुरा मां वाराही धाम में फल फेंकते लमगड़ियाा खाम के बगवाली वीर। संवाद
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देवीधुरा /पाटी (चंपावत)। आठ मिनट तक लगातार दिल थाम देने वाला पाषाण युद्ध। चार खाम, सात थोक के वीर याेद्धा और हजारों लोगों की भीड़। मां वाराही धाम में रक्षाबंधन पर्व पर शनिवार को विश्व प्रसिद्ध बगवाल खेली गई। इसमें पत्थरों के साथ फल-फूल और लाठियों की बारिश के बीच 183 लोग घायल हो गए। पुलिस और प्रशासन की देखरेख में हुए इस प्रतीक युद्ध में आईं ये चोटें श्रद्धा और परंपरा के प्रति अनूठे समर्पण की निशानी हैं। इन 480 सेकंड में परंपरा का जिस वीरता से निर्वाह हुआ वह पूरे साल नहीं भुलाया जाएगा।
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ऐतिहासिक खोलीखाड़ दुबाचौड़ मैदान में पहले चारों खामों में गहड़वाल, चम्याल, वालिक, लमगड़िया और सातों थोकों के बगवाली वीरों ने मां वज्र वाराही के जयकारे लगाकर शक्तिपीठ की परिक्रमा की। वालिक खाम के मुखिया बद्री सिंह बिष्ट के नेतृत्व में सफेद ड्रेस में वीर मंदिर पहुंचे। गंगा सिंह चम्याल के नेतृत्व में गुलाबी ड्रेस में चम्याल खाम वीर पहुंचे। वीरेंद्र सिंह लमगड़िया के नेतृत्व में पीले वस्त्र में लमगड़िया खाम बगवाल वीर पहुंचे। गहड़वाल खाम के त्रिलोक सिंह बिष्ट के नेतृत्व नारंगी कुर्ते में बगवाली वीरों ने मैदान में प्रवेश किया। इसके बाद चारों खामों के योद्धा अपने-अपने मोर्चे पर डट गए।
मां वाराही धाम मंदिर के मुख्य पुजारी महेश चंद्र ने शंख ध्वनि के साथ बगवाल का शुभारंभ दोपहर 1:58 बजे किया। मंदिर छोर से वालिक और लमगड़िया खाम ने फल फूल बरसाकर बाद में पत्थर, डंडे, छोटे फर्रे बरसाकर बगवाल खेली। पूर्वी छोर से चम्याल और गहड़वाल खाम ने मोर्चा संभाला और मंदिर छोर से वालिका, लमगड़िया खाम ने मोर्चा संभाला।
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पहले नाशपाती, सेब और फूलों से बगवाल खेली गई। इसके बाद पत्थर और लाठियां भी चलीं। इस दाैरान 183 बगवाली वीर, पुलिस कर्मी और दर्शक घायल हुए। कुछ को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। कुछ के टांके लगाए गए। उत्साह के साथ ई-हाहाहा के शब्दों को उच्चारण करते हुए 2:06 बजे मुख्य पुजारी ने चंवर झुलाकर बगवाल समाप्ति का संकेत दिया। मुख्य अतिथि के ताैर पर केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा भी साक्षी बने।
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सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं

मेले के दौरान देवीधुरा की सड़कों पर पांव रखने तक के लिए जगह नहीं थी। पुलिस ने करीब दो किमी पहले ही वाहन रोक दिए थे। चंपावत समेत आसपास के जिलों की पुलिस लगाई गई थी। मेले का संचालन पीठाचार्य कीर्ति बल्लभ जोशी, भुवन चंद्र जोशी ने किया।

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कभी नर बलि की प्रथा थी

कभी नर बलि से शुरू हुई बगवाल, पत्थरों से होते हुए फल फूलों तक पहुंची। देवीधुरा का बगवाल लोगों की धार्मिक मान्यता का रूप है। किंवदंती है कि चम्याल खाम की एक वृद्धा के एकमात्र पौत्र की बलि देने की बारी आई तो वंश नाश के डर से उसने मां वाराही की तपस्या की। माता के प्रसन्न होने पर वृद्धा की सलाह पर चारों खामों के मुखियाओं ने आपस में युद्ध कर एक मानव के बराबर बहाकर कर पूजा करने की बात स्वीकार ली। तभी से ही बगवाल का सिलसिला चला आ रहा है। इसके बाद पत्थर से बगवाल खेलने की शुरुआत हुई। 2013 में उच्च न्यायालय ने पत्थरों के उपयोग पर रोक लगा दी थी, इसके बाद से यह परंपरा बदल गई है। अब बगवाल नाशपाती, सेब आदि से खेली जाती है, लेकिन बगवाल के बीच में रणबांकुरे पत्थर, डंडे भी फेंकते रहते हैं।


ये रहे मौजूद
डीएम मनीष कुमार, एसपी अजय गणपति, सीडीओ डॉ.जेएस खाती, सीएमओ डाॅ. देवेश चौहान, एसडीएम नीतू डांगर, सतीश पांडेय, विधायक नरेंद्र नेगी, विधायक राम सिंह कैड़ा, पूर्व सांसद डाॅ. महेंद्र पाल, मंदिर कमेटी अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व मंदिर कमेटी अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, महामंत्री रोशन सिंह लमगड़िया, राजू बिष्ट,लक्ष्मीदत्त जोशी, बहादुर नगदली, दीपक चम्याल, चंदन सिंह बिष्ट, ईश्वर सिंह बिष्ट, विक्रम सिंह कठायत, कीर्ति बल्लभ जोशी, भुवन चंद्र जोशी, जगदीश जोशी के साथ मंदिर कमेटी सदस्य और चार खाम सात थोक के रणबांकुरे शामिल रहे।
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बगवाल में कब क्या हुआ
सुबह 7:00 बजे से 10 बजे तक विराट पूजन
12:48 बजे गहड़वाल खाम मैदान में पहुंचा
01:01 बजे वालिक खाम मैदान में आया

01:17 बजे चम्याल खाम के योद्धा पहुंचे

01:48 बजे लमगड़िया खाम खोलीखांड दुबाचौड़ मैदान में पहुंची
1:58 बजे महेश चंद्र पुजारी ने शंखनाद कर बगवाल का शुभारंभ किया
01:58 बजे चार खामों के बीच बगवाल शुरू

02:06 बजे पुजारी महेश चंद्र पुजारी ने चवर झुलाकर बगवाल संपन्न होने का संकेत दिया
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