लोहाघाट में देव डांगरों को कंधे पर बैठाकर ले जाते श्रद्घालु।
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अश्विन नवरात्र की अष्टमी को विभिन्न गांवों से देव डांगर अवतरित होकर ऋषेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने दुग्ध स्नान करने के बाद लोहावती नदी में स्नान किया। देव डांगरों ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। मंगलवार रात डैंसली, कलीगांव, गंगनौला, भुमलाई, राईकोट, रायनगर चौड़ी, बिशुंग, कोलीढेक सहित 12 गांवों में देवी जागरण हुआ। देवी-देवताओं ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं के कष्टों का निवारण किया।
इन गांवों से बुधवार सुबह देव डांगरों को कंधों में जत्थों के रूप में लाया गया। श्रद्धालु देवी-देवताओं की जयकारा करते हुए चल रहे थे। कहा जाता है कि अष्टमी के दिन ऋषेश्वर मंदिर के समीप बने कुंड में स्नान करने आने वाले देवताओं के मार्ग को अंग्रेज टलक द्वारा बंद कर दिया गया था। गेट पर लोहे का ताला लगा दिया गया। अवतरित हुए ऋषेश्वर के डंगरिया ने अपने मार्ग खोलने के लिए अक्षतों से ताले पर प्रहार किया जिससे ताला टूट गया और गेट खुद ही खुल गया।
लोक कल्याण करते हैं शिव : लाल बाबा
रमक सूर्य मंदिर में शिव महापुराण जारी है। आठवें दिन बुधवार को कथा वाचक लाल बाबा ने कहा कि भगवान शिव और पार्वती की भक्ति से भक्त का लोक कल्याण होता है। कलाकारों ने शिव पार्वती की झांकी निकाली। अल्मोड़ा से आए कलाकार कल्याण सिंह, पंकज शर्मा ने भजनों से माहौल को भक्तिमय कर दिया।
कथा में रमक के अलावा मंगललेख, सिरना, पोखरी, वारसी, रीठा साहिब, ढोलीगांव आदि जगहों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।