इसे विद्यार्थियों की मेहनत और कार्यरत शिक्षकों की निष्ठा ही कहा जाएगा कि शिक्षकों की कमी के बावजूद इस जिले में उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट 88 फीसदी रहा। इसे प्रदेश में सबसे बेहतरीन रिजल्ट माना गया है। शिक्षा महकमे से जुड़े लोगों का कहना है कि जिन विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं, वहां पर कार्यरत शिक्षकों ने निष्ठा से काम किया और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार एलटी ग्रेड में 345 शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जबकि इंटर की कक्षाओं को पढ़ाने वाले प्रवक्ताओं के 607 पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें अंग्रेजी, गणित, विज्ञान जैसे अहम विषयों के पद खाली हैं। इसमें एक संतोषजनक बात यह है कि इन रिक्त पदों की जगह जिले में 554 गेस्ट टीचर तैनात किए गए थे। इनमें प्रवक्ता पद पर 425 और एलटी स्तर पर 129 गेस्ट टीचर ने शिक्षण कार्य किया। ठीक परीक्षा से पहले सभी गेस्ट टीचर हटा दिए गए थे।
जिले में राजकीय इंटर कॉलेजों और हाइस्कूलों में प्रधानाचार्यों के कुल सृजित पदों में 131 पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व वरिष्ठ शिक्षक को दिया गया है। राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के 128 पद हैं। इनमें से 52 पद रिक्त हैं। इसी तरह राजकीय हाइस्कूलों में प्रधानाचार्य के 87 में से 79 पद खाली हैं। इस समय हाइस्कूलों में प्रधानाचार्य पद पर तैनाती के लिए काउंसलिंग की जा चुकी है। जल्दी ही कुछ पद भरे जाने की उम्मीद है। फिर भी दूरस्थ इलाकों में शिक्षकों के पद रिक्त ही रहेंगे, क्योंकि अभी बड़े स्तर पर शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई है।
चरणबद्ध मूल्यांकन का मिला लाभ
पिथौरागढ़। देवसिंह राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. अशोक पंत का कहना है कि इस बार उत्तराखंड बोर्ड ने मूल्यांकन प्रणाली में काफी बदलाव किया था। चरणबद्ध मूल्यांकन प्रणाली का लाभ विद्यार्थियों को मिला है। यदि विद्यार्थी ने किसी सवाल का उत्तर पूरा सही नहीं किया था और वह उत्तर के करीब पहुंचा था तब भी उसको अंक दे दिए गए। इसके अलावा शिक्षकों ने भी काफी मेहनत की। उन्होंने कहा कि हाइस्कूल के परीक्षा परिणाम में जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है।