चंपावत जिले मिट्टी में कम होते पोषक तत्व नई चुनौती बन रहे हैं। जिले की खेती वाली मिट्टी में सल्फर, जिंक और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी है। यह बात कोलीढेक मृदा केंद्र में हुए परीक्षण में सामने आई।
खराब मिट्टी की सेहत की मुख्य वजह रसायनिक खाद और कीटनाशकों का अधिक उपयोग बताया गया है। कृषि विभाग ने सबसे कम पोषक तत्वों वाली ग्राम पंचायतों को चिन्हित कर उनमें सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार की है।
चंपावत जिले में करीब 17493 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। मिट्टी की कमजोर सेहत से तीन वर्षों में उत्पादन में सात फीसदी की कमी हुई है। बीते तीन वर्षों में कृषि विभाग ने जिले भर में मृदा परीक्षण के लिए 1480 नमूने लिए। इनमें से करीब 571 नमूनों में पोषण की कमी पाई गई। इनमें मुख्य रूप से सल्फर (गंधक), जिंक (जस्ता) और पोटेशियम का अभाव पाया गया।
इनकी कमी से पौधों की वृद्धि दर में कमी से लेकर रोग फैलने के खतरे बढ़ जाते हैं। मृदा परीक्षण परिणाम के अनुसार जैविक खाद का अधिक उपयोग, फसल को बदलकर बोने सहित कई उपाय कर खेती से अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। चंपावत ब्लॉक के रियासीबमनगांव, पाटी के जनकांडे, लोहाघाट केपुल्ला और बाराकोट के चामी गांव की मिट्टी में सबसे कम पोषक तत्व हैं।
जिले के चारों ब्लाकों के सबसे कम पोषक तत्वों वाली मिट्टी के मामले में एक-एक ग्राम पंचायत को चिन्हित किया जा चुका है। अब इन ग्राम पंचायतों को नि:शुल्क पोषक तत्वों की आपूर्ति के साथ ही गांवों के किसानों को जागरूक किया जाएगा, जिससे पोषण की कमी को दूर करने के साथ उत्पादन बढ़ा किसानों की आय बढ़ाई जा सके। इसके अलावा जिलेभर में मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। - राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
पचपकरिया में खुलेगी दूसरी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला
चंपावत। चंपावत जिले में जल्द ही दूसरी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला अस्तित्व में आएगी। कोलीढेक केंद्र के बाद जिले के मैदानी हिस्से बनबसा के पास पचपकरिया में इस केंद्र को खोला जाएगा। मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती ने बताया कि इस मृदा परीक्षण केंद्र को सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) के अंतर्गत लगाया जाएगा।