जिले में स्वरोजगार को बढ़ावा देने में सक्षम होने के बावजूद पशुपालन बुरे हाल में हैं। न पशुओं की देखरेख का कायदे से बंदोबस्त है और नहीं विभागीय ढांचा दुरुस्त है। 14 पशु अस्पतालों में से आठ में फार्मेसिस्ट नहीं है। पशुधन प्रसार अधिकारियों के एक-तिहाई पद खाली हैं। और तो और डॉक्टरों के सभी पद भी भरे नहीं जा सके हैं।
जिले की प्रभारी मंत्री रेखा आर्या के जिम्मे पशुपालन विभाग होने से पशुपालनों में अस्पतालों में सुविधाओं के बेहतर होने की उम्मीदें बढ़ी। लेकिन फिलहाल हालात जस के तस हैं। उम्दा पशुधन होने के बावजूद पशुपालक गरीबी से उबर नहीं पा रहे हैं। चंपावत जिले की करीब 2.60 लाख की आबादी में से 1.34 लाख लोग पशुपालक हैं। जिले में 1.07 लाख गायों सहित करीब 2.45 लाख पशु हैं। भैस, बकरी, सुअर, खरगोश, मुर्गी, घोड़े, खच्चर को भी यहां बहुतायत में पाला जाता है। एक दुधारू पशु रोजाना औसतन दो लीटर दूध दे रहा है। जबकि कई जगह तो घोड़े व खच्चर लोगों की आवाजाही माल ढोने में भी काम आता है। पर इतनी बड़ी संख्या में पशुधन के बावजूद यहां के पशुपालकों की माली हालत नहीं सुधर पा रही है। जिले के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में पशुपालन संवर्धन के लिए 142.9 लाख रुपए बजट का जिला योजना में प्रावधान किया गया है। पर फिर भी पशुपालकों के चेहरों में चमक नहीं आ सकी है।
जिले के 14 पशु अस्पतालों को संचालित करने के लिए 15 फार्मेसिस्ट हैं। आठ अस्पतालों में एक में भी फार्मेसिस्ट नहीं है। फार्मेसिस्टों के 15 पदों के सापेक्ष महज छह हैं। वहीं पशु प्रसार केंद्रों की स्थिति भी सिरदर्द बनी हुई हैं। एक भी पशुधन प्रसार अधिकारी न होने से 11 सेवा केंद्रों से पशुपालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा बनबसा और नरियालगांव पशु अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं है। वहीं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में दो कर्मी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ सहायक को यूएस नगर जिले से संबद्ध किया गया है।
फार्मेसिस्ट विहीन 8 पशु अस्पताल
चंपावत राजकीय पशु चिकित्सालय (दो फार्मेसिस्ट), राजकीय सहायक पशु चिकित्सालय चंपावत, टनकपुर, नरसिंहडांडा, चमदेवल, बर्दाखान, रेगड़ू और पाटी।
पशुधन प्रसार अधिकारी विहीन 11 केंद्र
राजकीय अंगोरा शशक प्रजनन प्रोजेक्ट, पशु सेवा केंद्र मुख्यालय, कर्णकरायत, इजड़ा, देवीधूरा, मंच, ओलखढुंगा, बसेड़ी, ज्योश्यूड़ा, चौड़ामेहता व भिंगराड़ा।
डॉक्टरविहीन 2 पशु अस्पताल
राजकीय पशु चिकित्सालय बनबसा और नरियालगांव।
मुख्यालय के अस्पताल में दो साल से फार्मेसिस्ट नहीं
जिला मुख्यालय के पशु अस्पताल में हर रोज औसतन 20 मवेशियों का इलाज किया जाता है। लेकिन इस अस्पताल में बीते दो वर्ष से फार्मेसिस्ट नहीं है। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. जेपी यादव बताते हैं कि फार्मेसिस्ट नहीं होने से दवाओं के वितरण से लेकर इलाज में मदद के लिए स्वास्थ्य कर्मी तक नहीं है। अस्पताल के विभागीय रिकार्ड के रखरखाव में भी दिक्कतें आती हैं। बाराकोट के फार्मेसिस्ट को सप्ताह में एक दिन चंपावत संबद्ध किया गया है।
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18 दिनों में तीन दौरे कर चुकी हैं पशुपालन मंत्री
प्रदेश की पशुपालन मंत्री और जिले की प्रभारी मंत्री रेखा आर्या मई माह में ही तीन बार चंपावत जिले का दौरा कर चुकी हैं। 10 मई, 25 मई व 27 मई को प्रभारी मंत्री जिले के दौरे पर रही, लेकिन उनके इस दौरे से पशुपालन विभाग की सेहत में फिलहाल तो रत्तीभर भी सुधार नजर नहीं आ रहा है। न पशुपालन करने वालों की सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई और न ही पशु अस्पताल के रिक्त पदों को भरा जा सका है।
जिले के पशु अस्पतालों में फार्मेसिस्टों और पशुधन प्रसार अधिकारियों की काफी कमी है। रिक्त पदों को भरने के लिए मुख्यालय से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। कर्मियों की कमी के बावजूद काम को पटरी पर लाने की कवायद की जा रही है। -डॉ. पीएस भंडारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, चंपावत।