चंपावत। आयुर्वेदिक चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. संपूर्णानंद रतूड़ी ने कहा है कि कोरोना महामारी ने लोगों को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को समझने तथा उसके निकट लाने का काम किया है। इस दौरान आयुर्वेदिक दवाओं की व्यापक मांग होने के साथ लोग रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने के लिए गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा, दालचीनी, अदरक, हल्दी, काली मिर्च, सौंठ आदि का प्रयोग करने लगे हैं। इससे कई जड़ी- बूटियों को लोग घर में लगाने लगे हैं।
जिले के भ्रमण पर आए संयुक्त निदेशक ने बताया कि सूबे में टनकपुर, हल्द्वानी और टिहरी में 50-50 बिस्तरों के आयुर्वेदिक अस्पताल और दो सौ से अधिक उच्चीकृत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं। इनमें लोहाघाट, मडलक, बनबसा और चंपावत भी शामिल हैं। उन्होंने लोहाघाट के आयुर्वेदिक अस्पताल और चौड़ाढेक स्थित प्रस्तावित आयुष ग्राम स्थल का भी निरीक्षण किया। कहा यहां भारत सरकार के सहयोग से उच्चकोटि का आयुष ग्राम स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोहाघाट में पंचकर्म, क्षारसूत्र और महिला रोग शल्य चिकित्सा, मर्म चिकित्सा के अलावा बाल रोग के साथ आयुर्वेद की अन्य सभी चिकित्सा विधाओं की सुविधा मिलेगी। जिले में आयुर्वेदिक दवाओं का कोटा बढ़ाया जाएगा। भ्रमण के दौरान जिला आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. यूसी पाठक भी उनके साथ थे।