चंपावत। जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) में भवन मानचित्र अब आवेदन के 15 दिन के भीतर अनुमोदित करने होंगे, लेकिन चंपावत में ये काम आसान नहीं है। इसकी वजह डीडीए में स्टाफ की भारी कमी है। सिर्फ एक बाबू के सहारे विभाग की रोजमर्रा की गतिविधियां चल रही है। यहां तक कि भूगर्भशास्त्री का काम भी 178 किमी दूर बागेश्वर जिले के अधिकारी कर रहे हैं। इस वजह से निर्माण स्थल के मृदा के मुआयने के लिए अधिकारी के आने में समय लगता है।
नगर क्षेत्र के समुचित विकास और नियोजन के लिए चंपावत में चार साल पूर्व डीडीए का गठन हुआ और टनकपुर में इसका क्षेत्रीय कार्यालय है, लेकिन इस प्राधिकरण में एक बाबू को छोड़ अन्य सभी पद खाली हैं। लेखाकार, बहुउद्देश्यीय कार्मिक, कनिष्ठ सहायक और भी आठ अभियंताओं के पद खाली हैं।
डीडीए के सचिव एडीएम टीएस मर्तोलिया का कहना है कि काम चलाने के लिए दूसरे विभागों के अभियंताओं से बारी-बारी से काम लिया जा रहा है। इस वक्त लोनिवि, ग्रामीण निर्माण विभाग, सिंचाई, पीआईयू और टनकपुर नगर पालिका के अभियंताओं से काम चलाया जा रहा है। इन अभियंताओं के पास अपने विभाग का भी काफी काम होने से काम में देरी हो रही है।
लंबित हैं 11 आवेदन
चंपावत। जिले में कुल 454 आवासीय और 20 व्यावसायिक आवेदन आए हैं। इनमें से 11 मामले लंबित हैं। डीडीए आवेदन, विकास, उप विभाजन, पर्यवेक्षण, भूउच्चीकरण शुल्क वसूलता है। उसे इन मदों पर कुल 75 लाख शुल्क एकत्र हुआ है। डीडीए के लिपिक दीपक चतुर्वेदी बताते हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और राज्य राजमार्ग (एसएच) के 200 मीटर के दायरे में राजस्व गांव या नगरीय क्षेत्र को अनिवार्य रूप से अनुमोदन लेना पड़ता है।