रीठासाहिब(चंपावत)। रीठा साहिब में महिला उद्यमी दया गुरुरानी ने पहाड़ी व्यंजनों का कारोबार शुरू कर अन्य महिलाओं के लिए उम्मीद की राह खोली है। दया की ओर से घर में ही कई प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं जिन्हें खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। स्वयं का कारोबार संचालित करने के साथ ही दया क्षेत्र की महिलाओं और अन्य लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं।
दया ने बताया कि वह घर में ही पेठे की बड़ी, लौकी-कद्दू बड़ी, नमक, लहसुन, भांग, भंगीरा, जीरा मसाला, धनिया, मिर्च, हल्दी हर्बल चाय, कंडाली चाय, अदरक कैंडी, लहसुन का अचार, आम का अचार, मिक्स अचार, गाजर-गोभी का अचार सहित कई अन्य उत्पाद तैयार करती हैं। वर्तमान में वह अन्य महिलाओं को भी अपने साथ शामिल कर उनको प्रशिक्षण दे रही हैं।
दया का कहना है कि रीठा साहिब में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्री उनके उत्पादों को अपने साथ ले जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विष्णु दत्त गुरुरानी का कहना है कि सभी उत्पाद खुद ही तैयार कर के खुद ही पैक किए जाते हैं। गुरुद्वारा प्रबंधक बाबा श्याम सिंह, भगवान राम आदि का कहना है कि स्थानीय उत्पादों की पहल सराहनीय है, अन्य लोगों को भी स्वरोजगार के लिए इस तरह की पहल करनी चाहिए।
बेहद प्रसिद्ध हो रही है बिच्छू घास से बनी चाय
रीठासाहिब(चंपावत)। दया गुरुरानी की ओर से तैयार किए जा रहे विभिन्न स्थानीय उत्पादों में बिच्छू घास से बनी चाह काफी प्रसिद्ध हो रही है। इसी प्रकार पेठे की बड़ी भी बहुत मशहूर है। स्थानीय उत्पादों में किसी भी प्रकार की कोई मिलावट या रसायन का प्रयोग नहीं किया जाता है जिससे लोग उत्पादों को हाथों हाथ ले रहे हैं। संवाद