इसे हरतोला, भनार, मोस्टा, बकोड़ा, सौराई, वंडा, सुंगरौन, गंगसीर, खिरद्वारी, चूका सहित नेपाल सीमा से लगे कई गांवों के लोगों का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि आज भी यह लोग केरोसिन से जलने वाली डिबरी के ही सहारे हैं, वहीं, सीमा पार नेपाल के इलाकों में बिजली जगमगाती रहती है। हालांकि, इन गांवों में करीब एक दशक पहले बिजली की लाइन और ट्रांसफार्मर तक लगा दिया गया है। तारों का कोई उपयोग न होने के कारण यह लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं हैं।
नेपाल सीमा से लगे इन इलाकों के तीन हजार से अधिक लोग आज भी केरोसिन से जलने वाली डिबरी के सहारे हैं। वे न टेलीविजन के जरिए देश-दुनिया की जानकारी हासिल कर सकते हैं और नहीं कंप्यूटर का उपयोग कर संचार और सूचना क्रांति का कोई उपयोग कर पा रहे हैं। यहां तक इन गांवों के लोगों को मोबाइल चार्जिंग के लिए भी वैकल्पिक उपाय करना पड़ रहा है। पर बिजली न होने का सबसे ज्यादा असर यहां के पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
गांव वाले सीएम के सामने उठा चुके आवाज
गांव के लोग सीमावर्ती क्षेत्र के गैर विद्युतीकृत गांवों का मामला क्षेत्र पंचायत की बैठक से लेकर मुख्यमंत्री के दरबार तक में उठा चुके हैं, मगर अब तक गांव रोशन नहीं हुआ है। बीडीसी सदस्य कैलाश सिंह बोहरा इस मामले को क्षेत्र दौरे पर आए मुख्यमंत्री हरीश रावत के सम्मुख दो बार उठा चुके हैं। उनका कहना है कि जनवरी तक गांवों के विद्युतीकृत होने की बात कही गई, मगर अब तक कुछ नहीं हुआ। अब फिर से दान सिंह, विपिन जोशी, राजेंद्र सिंह, जगदीश, प्रेम, बची सिंह, मेघनाथ, चंचल, सूरज सिंह आदि ने डीएम को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की है। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बिजली विभाग से अविलंब कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सीमावर्ती गांव मोस्टा, बकोड़ा, सौराई को विद्युतीकृत करने के लिए टेंडर हो चुके हैं। विभाग द्वारा निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। तार, पोल, ट्रांसफार्मर आदि को बदला जाएगा। 12 किलोमीटर लंबी इस लाइन का ये काम तीन महीने में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद चूका, गंगसीर, खिरद्वारी आदि गांवों की लाइनें ठीक की जाएगी। -आरसी पंत, जूनियर इंजीनियर, यूपीसीएल, चंपावत।