बारिश से अस्त-व्यस्त हुई मां पूर्णागिरि धाम की व्यवस्थाओं के हाल जस के तस बने हैं, इससे यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हनुमानचट्टी के पास एक सप्ताह पहले धंसे सड़क के आधे हिस्से में कोई बचाव कार्य न होने से जहां हादसे का खतरा बना है, वहीं बारिश से सड़क के और धंसने की आशंका बनी है, लेकिन रास्ते की दशा सुधारने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जा रहे है। धाम क्षेत्र की क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों को भी दुरुस्त नहीं करने से समूचे क्षेत्र में पेयजल का संकट बना है।
बरसात के दिनों में भी मां पूर्णागिरि के दर्शन को दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, लेकिन बारिश के कारण ध्वस्त हुई धाम क्षेत्र की व्यवस्थाओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता से यात्री परेशानी झेलने को विवश हैं। सिद्धमोड़ के पास पैदल मार्ग पर दरकी पहाड़ी का मलबा अब भी पड़ा है। यात्री जोखिम उठाकर मलबेे के ऊपर से आवाजाही करने को मजबूर हैं। वहीं हनुमानचट्टी के पास धंसी सड़क को बचाने की भी कोई कोशिश नहीं की गई है, इससे सड़क के और धंसने की आशंका बनी है। बाटनागाड़ में आए मलबे को हटाकर गाड़ियों के आवाजाही लायक बनाया गया है, लेकिन पूरी तरह मलबा साफ न किए जाने से यात्रियों के छोटे वाहन मलबे में फंस रहे हैं। एसडीएम अनिल चन्याल का कहना है कि लोनिवि को पूर्णागिरि मार्ग की दशा सुधारने को कहा गया है। इधर, लोनिवि के एई एपीएस बिष्ट का कहना है कि इस बीच बारिश होने से काम में बाधा आ रही है, मौसम खुलते ही रास्तों की दशा सुधारने का काम शुरू किया जाएगा।