खेतीखान में मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित बैठकी होली में होल्यारों ने विभिन्न रागों में होली गायन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बुधवार रात डॉ. बद्रीदत्त भट्ट के आवास में हुई होली का शुभारंभ सतीश कर्नाटक ने राग काफी में-गणपति को भज लीजै... होली के साथ किया। मेजबान बद्रीदत्त ने तू मृत्यु लोक में आई गंगे की सुंदर प्रस्तुति दी।
शंकर दत्त कापड़ी ने राग झिंझोटी में होली खेलूंगी में तो आज उन्हीं के संग, महेश जोशी ने राग सहाना में आओ गोपाल श्रृंगार करुं तोरा तथा महेश भट्ट ने कहत निषाद सुनो रघुनंदन और सतीश जोशी ने राग सहाना में बाली उमर मोरि पिया घर नाहीं तथा राग देश में-अपने ही रंग में रंगा दे की शानदार प्रस्तुति दी। हारमोनियम में सतीश कर्नाटक और बद्रीदत्त भट्ट तथा तबले पर गोपाल पुजारी, मनोज पुजारी एवं घनश्याम भट्ट ने संगत दी। कार्यक्रम के अंत में सतीश कर्नाटक ने राग भैरवी में चलो री चलो सब झूला झूलन होली प्रस्तुत की। संचालन मनीष भट्ट ने किया।
राम नाम की होली, जगत बिच जिसने खेली
पाटी (चंपावत)। उत्तरायणी पर्व पर मस्टा संगीत कला समिति की ओर से बैठकी होली का आयोजन किया गया। इस दौरान होल्यारों ने होली गीतों की प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
समिति अध्यक्ष शिक्षक रवीश पचौली के आवास में आयोजित बैठकी होली का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ किया गया। समिति संयोजक सीएस मौनी ने राग यमन में राम नाम की होली, जगत बिच जिसने खेली होली गीत से शुभारंभ किया।
सागर मौनी ने राग केदार में जटन विराजत गंगे, भोले नाथ दिगंबर, विशाल पचौली ने मन रंग दे करतार, आरएस मौनी ने राग यमन में जै जै जै कृष्ण मुरारी कृपा करो, पंकज पचौली ने राग काफी में भव भंजन गुण गाऊं, केसी भठ्ठ ने राग देश में चलो री चलो सब होली खेलन को तट यमुना की ओर, प्रदीप पचौली ने कहत निषाद सुनो रघुनंदन नाथ न लूं तुमसे उतराई, एमएन पचौली ने जै जै जै शिवशंकर भोले नाथ दिगंबर, प्रदीप प्रकाश ने क्या जिंदगी का ठिकाना गीत की शानदार प्रस्तुति दी। सीएस मौनी ने राग देश में गुरु बिन कौन दिखाये राह से समापन किया।
तबले में ताल राजू मौनी, सौरभ अवस्थी, सागर मौनी, कैलाश भठ्ठ ने ठोकी। नरेश गहतोड़ी, तन्मय पचौली, संदीप, बसंत, निर्मला, भावना, केशवी ने सुर में सुर मिलाया।