पूर्णागिरि मंदिर में स्थापित मां पूर्णागिरि देवी की मूर्ति।
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मां पूर्णागिरि धाम के मेले का आयोजन सरकारी तौर पर जरूर होता है लेकिन मेले को सरकारी इमदाद नहीं मिलती है। जिला पंचायत संचालित यह मेला इस बार 11 मार्च से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा। मेले के आयोजन में आयोजक संस्था को हर साल नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीते तीन वर्षों में ही उसे 30 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
मां पूर्णागिरि धाम मेले में 2008 तक प्रदेश शासन से मेला अनुदान मिलता रहा है। तब आखिरी बार 15 लाख रुपये शासन से प्राप्त हुए लेकिन इसके बाद से कभी भी कोई अनुदान नहीं मिला। जिला पंचायत का कहना है कि अनुदान के लिए हर बार पत्र भेजा जाता है लेकिन अनुदान नहीं मिलता। अनुदान नहीं मिलने से पंचायत को मेले के संचालन में घाटा सहना पड़ता है।
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि लंबे समय से अनुदान बंद होने से मेले में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए तमाम व्यवस्थाओं को जिला पंचायत अपने स्तर से करती है। इन व्यवस्थाओं को करने में पंचायत को घाटा सहना पड़ता है। बीते तीन वर्षों में ही 30 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। मां पूर्णागिरि व्यापार संघ अध्यक्ष पंडित भुवन चंद्र पांडेय, किशन तिवारी, मोहन पांडेय सहित तमाम पुजारियों ने तीर्थ यात्रियों को अधिक से अधिक सुविधा दिलाने के लिए मेला अनुदान देने का आग्रह किया है।
मां पूर्णागिरि धाम का मेला चंपावत जिले को आध्यात्मिक पहचान देता है। मेले में तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक रकम खर्च होती है लेकिन मेले का अधिकतर हिस्सा आरक्षित वन क्षेत्र का होने से आय नहीं हो पाती है। प्रशासन मेले से आय बढ़ाने के तरीके विकसित करने के साथ शासन को पत्र भेज सरकारी अनुदान का आग्रह करेगा। सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।