जिले के विभिन्न स्थानों में रामलीलाओं मंचन जारी है। मल्लीहाट में लक्ष्मण शक्ति के बाद लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध का मंचन किया गया। फुलारागांव, सैंदर्का और धौन में रामलीला देखने को ग्रामीण उमड़ रहे हैं।
जिला मुख्यालय के दूरस्थ क्षेत्र कोट अमोड़ी में भी रामलीला मंचन शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को रामलीला कमेटी अध्यक्ष खीमानंद भट्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता ललित मोहन, दिनेश भट्ट, तुलसी दत्त भट्ट आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला का शुभारंभ किया।
दूसरे दिन की लीला में दशरथ-विश्वामित्र संवाद, विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाना, जंगल में ताड़का का वध करने के बाद पुष्पवाटिका की सैर, राम का लक्ष्मण को पुष्प वाटिका में घुमाना व पुष्प वाटिका में सीता से मुलाकात के बाद गौरी पूजन तक की लीला का मंचन किया गया। इसमें सीता अपनी सहेलियों से कहती हैं पूजन को अंबे गौरी, चलियो सखी सहेली। वहीं बेलखेत में चौथे दिन की रामलीला में सीता विवाह की लीला का मंचन किया गया।
पाटी की रामलीला में दूरदराज के गांवों से भारी भीड़ उमड़ रही है। बृहस्पतिवार रात की लीला में राजा जनक द्वारा सीता स्वयंवर के लिए राजाओं को न्यौता देने की लीला का मंचन किया गया। महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंच राम व लक्ष्मण को जंगल ले जाने के लिए पूछते हुए कहते हैं कि बता जल्दी ए राजा तू राम देगा कि नहीं...।
आयोजन में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र लडवाल, टीका राम सौराड़ी, देवेंद्र मौनी, सुरेश भट्ट, राम सिंह मेहता, चतुर सिंह मेहता पीतांबर गहतोड़ी, तेज सिंह बिष्ट आदि सहयोग कर रहे हैं। उधर चौमेल की रामलीला में धनुष यज्ञ की लीला का मंचन किया गया।
पाटी की रामलीला में दशरथ-विश्वामित्र संवाद का नजारा।- फोटो : CHAMPAWAT