नगर के गोरखानगर में युवाओं की ओर से आयोजित दुर्गा महोत्सव ने यहां के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक परिवेश को बदल दिया है। इसे मां दुर्गा की कृपा ही कहा जा सकता है। जिस मोहल्ले में पहले सांभर का जूता लोहाघाट की सौगात के लिए प्रसिद्ध हुआ करता था, उस मोहल्ले ने बाद में सामाजिक विकृतियों के चलते खामोशी ओढ़ ली।
वर्ष 2000 में जब देवीधार महोत्सव की शुरुआत हुई तो यहां की सभासद अनीता गोरखा, शेखर गोरखा, विनोद गोरखा, प्रकाश गोरखा, भुवन गोरखा, सचिन, बॉबी, अजय आदि युवाओं में यह प्रेरणा जागृत हुई कि जब अन्य स्थानों में लोग संगठित होकर यह कार्य कर सकते है तो ऐसा करने का माददा हम में भी है।
शुरुआती दौर में पांच दिन का दुर्गा महोत्सव आयोजित किया गया। महोत्सव की सफलता को देखते हुए 2008 से इसे दस दिन तक मनाया जाने लगा। खेल, शैक्षिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के लिए मोहल्ले के लोगों को तैयार किया गया।
पूर्ण रूप से व्यक्तिगत प्रयासों से आयोजित हो रहे इस महोत्सव ने मोहल्ले की तस्वीर और लोगों की तकदीर बदल दी है। युवाओं ने मोहल्ले की उन्नत सामाजिक व्यवस्था को ऐसा रूप दिया है जिसमें सभी बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के साथ मोहल्ले में पूर्ण शराबबंदी, स्वच्छता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
यह मां दुर्गा की ही कृपा रही की मोहल्ले के लोगों में सद्बुद्धि के साथ आए सद्विचारों ने दुर्गा महोत्सव आयोजित करने की प्रेरणा दी। आज मोहल्ले का सामाजिक परिवेश ही बदल गया है। अनीता गोरखा, पूर्व सभासद।
यदि युवा सही मायनों में कोई बात ठान लें तो असंभव को संभव किया जा सकता है। ऐसा हमारे मोहल्ले के युवाओं ने कर दिखाया है।
विनोद गोरखा, पूर्व सभासद।
दुर्गा महोत्सव के कारण यहां के युवकों में आगे बढ़ने की होड़ शुरू हुई। आज यहां के कई युवा पढ़ लिखकर सम्मान के साथ जीवन यापन करते हुए सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए संगठित प्रयास कर रहे हैं। शेखर गोरखा, फार्मासिस्ट।
जीवन के अंतिम पड़ाव में अपने नाती पोतों को ऐसा अच्छा कार्य करते हुए देखकर जीवन की घोर निराशा एवं अतीत के कटु अनुभवों को भूलते हुए उनकी उम्र बढ़ गई है। बसंती आमा, बुजुर्ग।
शेखर गोरखा, फार्मासिस्ट।- फोटो : CHAMPAWAT
विनोद गोरखा, पूर्व सभासद।- फोटो : CHAMPAWAT
अनीता गोरखा, पूर्व सभासद।- फोटो : CHAMPAWAT