पहाड़ में सोने-चांदी के जेवरातों (आभूषणों) को पहनना न केवल शुभ माना जाता है, बल्कि यह परंपरा का हिस्सा है, लेकिन अब इस लंबी परंपरा पर चोर-उच्चके भारी पड़ रहे हैं। यहां सिप्टी-पुनावे क्षेत्र की महिलाएं जेवरात पहनने से कतरा रही हैं। वजह करीब दो सप्ताह पूर्व सड़क चलती एक महिला से मंगलसूत्र झपट लिया गया और चोरों का अब तक पता नहीं लगाया जा सका।
पहाड़ पर कमजोर माली हालत वाली महिलाएं भी आर्टिफिशियल नहीं, सोने-चांदी के जेवरात पहनती है। ये आभूषण किसी खास उत्सव या शादी-ब्याह में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में पहनती हैं। सोने के कर्णफूल, मंगलसूत्र, गलोबंद, नाक की फुल्ली आदि को पहनकर घर के भीतर से लेकर जंगल से लकड़ी और चारा घास लाने का काम करती है, मगर अब जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर सिप्टी-पुनावे, सैंदर्क क्षेत्र के गांवों में महिलाओं ने जेवरात पहनना बंद कर दिया है या एकदम कम कर दिया है।
इसकी वजह यहां पुनावे में 21 दिसंबर को जीप का इंतजार कर रही गीता देवी का मंगलसूत्र झपट लिया जाना है। डेढ़ तौले का करीब 38 हजार रुपये कीमत के इस मंगलसूत्र की लूट से यहां लोग सकते में हैं। इस इलाके के निवासी और भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष श्याम सिंह का कहना है कि वारदात के बाद से लोग खासकर महिलाओं में दहशत हैं। मामले का खुलासा नहीं होने से ग्रामीणों में अब भरोसा भी नहीं जग पा रहा है।
क्लू से भी दूर पुलिस
कोतवाली पुलिस ने चोरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 394 के तहत मुकदमा दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी को पूरा मान लिया है। चोरों को पकड़ पाना तो दूर, कोई क्लू तक पुलिस को नहीं मिल पा रही है। जांच अधिकारी प्रकाश विश्वकर्मा का कहना है कि कई लोगों से पूछताछ की गई, मगर अभी ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। वहीं पुलिस का कहना है कि महिला भी चोर को न पहचान पाने की बात कह रही है।