फर्जी दस्तावेजों से डंपर चलाने के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद से फरार चल रहे नौ आरोपियों में से चार ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता गुणानंद थ्वाल ने बताया कि मामले में अगली सुनवाई 25 मई को होगी।
टनकपुर में करीब डेढ़ माह पूर्व फर्जी दस्तावेजों से चल रहे नौ डंपर स्वामियों के कुल 14 वाहन पकड़े गए थे। डीएम रणवीर सिंह चौहान के आदेश मामले की जांच हुई। टनकपुर के एसडीएम और सीओ की संयुक्त जांच रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों की कूट संरचना तैयार कर फर्जी आरसी (पंजीकरण प्रमाणपत्र) और परमिट तैयार करने की पुष्टि हुई थी।
जांच में इस बात की भी तस्दीक हुई कि नौ लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये हरियाणा के डंपरों को टनकपुर में चलाया। इसके आधार पर 12 मई को एआरटीओ रश्मि भट्ट ने टनकपुर कोतवाली में नौ वाहन स्वामियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 में मामला दर्ज करवाया था।
मामला दर्ज होने के बाद से पुलिस के तमाम प्रयासों के बावजूद आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए एक आरोपी ने पिछले सप्ताह हाईकोर्ट की शरण भी ली लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
सोमवार को टनकपुर के कोतवाल चंद्रमोहन सिंह ने अदालत से आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्लू) हासिल कर लिया था। इस बीच मंगलवार को आरोपी ककरालीगेट निवासी कुलदीप पाटनी, आमबाग निवासी भुवन महरा, राजेंद्र सिंह और कुंदन सिंह ने अदालत में आत्मसमर्पण किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र कुमार की अदालत ने चारों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में लोहाघाट जेल भेज दिया है।
अभी पांच आरोपी सूर्य प्रकाश गड़कोटी, मोहित गड़कोटी, बसंत कुमार, चेतराम और राजेंद्र कुमार पुलिस गिरफ्त से दूर हैं। बचाव पक्ष के अधिवक्ता गुणानंद थ्वाल ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी। पांचवें आरोपी मोहित गड़कोटी ने आत्मसमर्पण के लिए आवेदन किया है।
डंपर घोटाले में काम न आ सका सियासी दबाव
चंपावत। फर्जीवाड़े मामले में कुछ आरोपियों की नेताओं से नजदीकी बताई जाती है। इसके चलते कुछ सियासी लोगों ने मामले को रफा-दफा कराने के लिए दबाव भी बनाया लेकिन मामले के तूल पकड़ने से दबाव काम न आ सका।
ऐसे पकड़ में आया मामला
चंपावत। डंपर पंजीकरण मामले के फर्जीवाड़े को उजागर करने में वन विकास निगम की खास भूमिका रही। उत्तराखंड वन विकास निगम के टनकपुर के खनन अधिकारी हरीश पाल ने शक होने पर दो माह पूर्व शारदा नदी में खनन के लिए पंजीकृत वाहनों की सूची को सत्यापन के लिए टनकपुर एआरटीओ कार्यालय भेजा। एआरटीओ रश्मि भट्ट ने 14 वाहनों के पंजीकरण टनकपुर एआरटीओ कार्यालय में नहीं होने की पुष्टि की। इसके बाद डीएम ने मामले की टनकपुर के एसडीएम और सीओ से संयुक्त जांच कराई। इसमें फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद 12 मई को मुकदमा दर्ज कराया गया।
शारदा से खनन को अनिवार्य है टनकपुर एआरटीओ दफ्तर में पंजीकरण
चंपावत। शारदा नदी से खनन के लिए टनकपुर एआरटीओ कार्यालय में वाहनों का पंजीकरण अनिवार्य है। हरियाणा और अन्य दूसरे राज्यों के वाहनों के पंजीकरण के लिए उन राज्यों का अनापत्ति प्रमाणपत्र जरूरी होता है। वाहन स्वामी बाहर के राज्य से लाए गए इन वाहनों के अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं ला सके लेकिन टनकपुर एआरटीओ कार्यालय की फर्जी मुहर और अन्य फर्जी दस्तावेजों से वाहनों का पंजीकरण करा लिया गया। एआरटीओ कार्यालय के इस फर्जी प्रमाणपत्र से खनन के लिए पंजीकरण भी हो गया था।