चंपावत के मुख्य चिकित्साधिकारी डा.प्रवीण कुमार पर उत्तराखंड सूचना आयोग ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सूचना देने में छह माह से अधिक के विलंब की वजह से ये जुर्माना लगाया गया है। राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने 14 अगस्त को ये आदेश दिए हैं। अपीलकर्ता राजेंद्र खर्कवाल के पास शुक्रवार को आदेश की प्रति पहुंची है।
टनकपुर के राजेंद्र खर्कवाल ने 24 नवंबर 2014 को सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से 8 बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी। सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की तैनाती, संबद्धीकरण, वेतन, प्रशासनिक मद, स्वास्थ्य पर हुए खर्चे, एनआरएचएम सहित तमाम बिंदुओं का विवरण मांगा था, लेकिन इन सूचनाओं का जवाब छह माह विलंब से दिया गया।
आयोग ने कहा कि बिंदु संख्या एक को छोड़ शेष सात सूचनाएं सीएमओ कार्यालय से संबंधित थी, लेकिन इन सूचनाओं को भी 29 जून 2015 को दूसरी अपील की सुनवाई के समय उपलब्ध कराया गया, जबकि बिंदु संख्या एक की सूचना के लिए अनुरोध पत्र के स्थानांतरण की कार्रवाई ढाई माह देरी से हुई। आयोग ने कहा कि 28 नवंबर 2014 को प्राप्त सूचना के लिए सीएमओ कार्यालय ने अनुरोध पत्र का स्थानांतरण 6 फरवरी 2015 को किया। राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने देरी के लिए सीएमओ की दलील को खारिज करते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस राशि को राजकोष में जमा कराने के आदेश दिए गए हैं।
कोषागार में फिलहाल जमा नहीं हुई रकम
राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत द्वारा लगाए जुर्माने की रकम को फिलहाल जमा नहीं कराया गया है। मुख्य कोषाधिकारी खजान चंद्र पांडेय ने बताया कि उनके कार्यालय को आदेश की प्रति नहीं आई है और नहीं वेतन से राशि कटौती करने के आदेश मिले हैं। सीएमओ द्वारा भी जुर्माने की रकम को अभी जमा नहीं कराया गया है।
सीएमओ ने नहीं किया फोन रिसीव
आयोग के आदेश के मुताबिक रकम जमा करने की जानकारी के लिए सीएमओ को फोन किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिस कारण यह रकम जमा की गई है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी।
सीएमओ कार्यालय पर की कड़ी टिप्पणी
राज्य सूचना आयुक्त ने चंपावत मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के आरटीआई प्रकोष्ठ की व्यवस्था पर कड़ी टिप्पणी की है। कहा कि सूचना के लिए अनुरोध पत्रों को प्राप्त करने और उन पर सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में कार्रवाई करने की कोई चौकस व्यवस्था नहीं है। सीएमओ द्वारा भी समय-समय पर इसकी समीक्षा नहीं की जाती है।