चंपावत। नाक का सवाल बन चुकी चोरी की घटना खुलासा करने में भी पुलिस नाकाम हो रही है। जिला मुख्यालय की अस्पताल कालोनी में 24 सितंबर की रात हुई चोरी की वारदात में पुलिस के हाथ अब तक पूरी तरह खाली है। 22 दिन बाद भी वह बस अंधेरे में तीर चला रही है। 24 लोगों से अब तक पूछताछ कर चुकी है। लेकिन कहीं कोई कामयाबी उसे नहीं मिल सकी है। पुलिस की इस नाकामी से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी - कर्मचारियों में भी गुस्सा है।
उल्लेखनीय है कि चोरों ने 24 सितंबर की रात को अस्पताल कालोनी निवासी जिला अस्पताल के लिपिक खीम सिंह बिष्ट के आवास का ताला तोड़कर दो लाख रुपये मूल्य से अधिक के आभूषणों में हाथ साफ कर दिया था। वारदात के दिन उनकी पत्नी ममता सहित पूरा परिवार पूजा के लिए गांव गया था। घटना की जानकारी पीड़ित परिवार को 25 सितंबर को सुबह वापस आने पर हुई। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 457 और 380 के तहत मामला दर्ज कर बाजार चौकी प्रभारी जगत सिंह सामंत को जांच अधिकारी बनाया।
कोतवाल सलाहउद्दीन ने बताया कि चोरी का सुराग लगाने के लिए स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) प्रभारी विनोद यादव, एसएसआई आरएस डांगी व दरोगा ललित मोहन पांडेय के नेतृत्व में तीन टीमें बनाई गई हैं। लेकिन ये टीमें भी 22 दिन में चोरों तक नहीं पहुंच सकी है। वहीं अस्पताल कालोनी के लोगों से पूछताछ करने से अस्पताल कर्मियों के परिवारों के बीच भी गलतफहमी के आसार बढ़ रहे हैं।
आज बैठक कर रणनीति तय करेंगे अस्पताल कर्मी
जिला अस्पताल के डॉक्टर और कर्मियों ने चोरी का खुलासा नहीं होने पर 10 अक्तूबर को एक दिनी वाह्य रोगी मरीज (ओपीडी) का बहिष्कार करने का एलान किया था। लेकिन एक दिन पूर्व 9 अक्तूबर को पुलिस ने चोरी का सुराग लगाने का आश्वासन देकर बहिष्कार को एक सप्ताह के लिए टलवाने में सफलता प्राप्त की। तब स्वास्थ्य कर्मियों ने 16 अक्तूबर तक आंदोलन को टाल दिया था। और तय किया था कि 16 अक्तूबर को बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।