करीब 18 महीने पहले जिस जंगल को नागनाथ को अर्पित किया था, तस्करों ने अब उन्हीं को निशाना बना रहे हैं। आरोप है कि चंपावत से करीब सात किलोमीटर दूर सेलाखोला वन पंचायत के जंगल से तकरीबन 50 छोटे पेड़ काट डाले गए। जानकारी मिलने पर वन पंचायत के सरपंच ने प्रशासन से जंगल को बचाने की गुहार लगाई है।
जंगल को बचाने के लिए पिछले साल सरपंच कैलाश सिंह ने वन पंचायत के जंगल को नागनाथ को पांच साल के लिए अर्पित किया था, मगर फिर भी यह जंगल असामाजिक तत्वों की नजरों से नहीं बच सका। जंगल से बांज, बुरांश, काफल सहित कई अन्य प्रजातियों के तकरीबन 50 छोटे-बड़े पेड़ों पर धड़ल्ले से कुल्हाड़ी चला दी गई। जानकारी मिलने पर सरपंच ने बुधवार को एसडीएम के पास पहुंचकर जंगल बचाने की गुहार लगाई।
बताया गया कि पेड़ काटने वाले इन पेड़ों की पत्तियों का उपयोग मुख्य रूप से जानवरों के चारे के रूप में कर रहे हैं। प्रभारी जिलाधिकारी जेएस राठौर ने अवैध कटान रोकने के लिए वन विभाग को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए है। विभाग ने मौका मुुआयना कर आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।
पेयजल स्रोत पर भी पड़ेगा असर
सेलाखोला वन पंचायत क्षेत्र के पेड़ कटने से न केवल जंगलों का नुकसान होगा, बल्कि भविष्य में पेयजल संकट भी पैदा हो सकता है। ये इलाका पेयजल स्रोत के लिए खासा महत्वपूर्ण है, मगर बांज, बुरांश के कम होने से पेयजल स्रोतों के सूखने का खतरा भी बढ़ सकता है।
चौकीदार को देने को पैसा नहीं
सेलाखोला वन पंचायत की सुरक्षा भी रामभरोसे है। यहां जंगल की हिफाजत के लिए कोई खास बंदोबस्त नहीं है। सरपंच का कहना है कि चौकीदार रखने को पैसा नहीं है। इस साल फायर सीजन में दो चौकीदार रखे थे, लेकिन इनका करीब 24 हजार रुपये का भुगतान भी जेब से करना पड़ा है। धन की कमी से अब उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई है। उन्होंने जंगल की हिफाजत के लिए वन विभाग से मदद की गुहार लगाई है।