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अकेली शिक्षिका नहीं, एक शिक्षक भी शामिल था छात्रा की पिटाई में

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सूचनार्थ....
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एक अन्य शिक्षक भी शामिल था छात्रा की पिटाई करने में
जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा
चौड़ाकोट प्राथमिक स्कूल की छात्रा की पिटाई करने मामले की विभागीय जांच पूरी
शिक्षक-शिक्षिका ने पिटाई की बात कबूल की
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। चंपावत विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़ाकोट में 17 मई को हुई छात्रा की पिटाई के मामले में शिक्षा विभाग की विभागीय जांच पूरी हो गई है। चंपावत के खंड शिक्षाधिकारी (बीईओ) अंशुल बिष्ट ने मामले की जांच की। वे जल्द ही जांच रिपोर्ट जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) को सौंपेंगे। जांच में पता चला कि पिटाई में अकेली शिक्षिका नहीं, एक अन्य शिक्षक भी शामिल था।
सूखीढांग के पास चौड़ाकोट की तीसरी कक्षा की छात्रा सीमा राना को 17 मई को गिनती नहीं सुना पाने पर एक शिक्षिका ने बेरहमी से पिटाई कर दी थी। पिटाई से छात्रा की पीठ और पांव में बुरी तरह से निशान लग गए। 18 मई को कुछ शिक्षकों की मौजूदगी में आरोपी शिक्षिका ने छात्रा के पिता से गलती मानी। जिसके बाद पीड़ित छात्रा के पिता रमेश राना ने किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया। मगर डीएम रणवीर सिंह चौहान के कड़े रवैये के बाद शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच कराई। जांच अधिकारी बीईओ अंशुल बिष्ट ने स्कूल में छात्रा, परिजन और संबंधित शिक्षक-शिक्षिकाओं के बयान लिए। जांच अधिकारी ने बताया कि जांच पूरी कर ली गई है। एक-दो दिन में जांच रिपोर्ट डीईओ को सौंप दी जाएगी। इधर डीईओ सत्यनारायण का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
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जांच रिपोर्ट में छात्रा की पिटाई में अकेली शिक्षिका नहीं, एक शिक्षक भी शामिल था। अलबत्ता ज्यादा पिटाई शिक्षिका ने की। दोनों ने जांच अधिकारी के समक्ष अपनी गलती को भी कबूल किया है। माना जा रहा है कि पिटाई करने वाले शिक्षक व शिक्षिका के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से लेकर तबादला तक की कार्रवाई की जा सकती है।
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इनसेट....
पिटाई पर कार्यवाही का स्पष्ट प्रावधान
चंपावत। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा-17 (1) में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि किसी भी बच्चे को किसी भी प्रकार के शारीरिक दंड एवं मानसिक प्रताड़ना नहीं दी जाए। यदि विद्यालय प्रधानाचार्य अथवा किसी शिक्षक द्वारा किसी छात्र को शारीरिक दंड देने संबंधी आरोप सिद्ध पाया जाता है, तो संबंधित के खिलाफ सरकारी सेवक आचरण नियमावली एवं उस पर लागू सेवा नियमावली में उल्लिखित प्रावधानों के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। ब्यूरो
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