चंपावत। बैंकों की सुरक्षा की सबसे ठीकठाक प्रक्रिया भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में है। यहां होने वाली तैनाती पूर्व सैनिक कल्याण विभाग के जरिये की जाती है। तैनात हर सुरक्षा कर्मी को बंदूक बैंक देता है और बंदूक का लाइसेंस भी प्रबंधक व गार्ड के नाम पर संयुक्त रूप से बनाया जाता है।
एसबीआई की चंपावत शाखा के मुख्य प्रबंधक एनके जौहरी का कहना है कि बैंक में सिपाही या हवलदार रैंक के पूर्व फौजी को सुरक्षा कर्मी के रूप में रखा जाता है। शैक्षिक अभिलेख, फौज की डिस्चार्ज बुक, पहचान पत्र जमा कराने के साथ ही शारीरिक व चिकित्सकीय परीक्षण में पास होने के बाद सत्यापन कराया जाता है। हर दो साल में गार्ड का मानसिक परीक्षण और तीन साल में सत्यापन कराया जाता है।
पर ढीलीढाली है अन्य बैंकों की सुरक्षा
ज्यादातर बैंकों में सुरक्षा कंपनियों के जरिये रखे जाते हैं गार्ड
चंपावत जिले के अन्य बैंकों की शाखाओं की सुरक्षा में मुस्तैदी कम है। ज्यादातर बैंकों में अलग-अलग सुरक्षा कंपनियों के जरिये गार्ड रखे जाते हैं। इसमें पहली प्राथमिकता आवेदक के पास बंदूक व बंदूक के लाइसेंस को दिया जाता है। लेकिन पूर्व फौजी होने की शर्त सब जगह नहीं है। सत्यापन का काम भी या तो होता नहीं या बस रस्म अदायगी भर है। लीड बैंक प्रबंधक आनंद सिंह रावत का कहना है कि 18 बैंकों की 60 शाखाओं में सुरक्षा की समीक्षा कराई जाएगी। तैनात गार्डों का फिर से सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए पत्र भेजा जा रहा है।