चंपावत। विशेष सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने विवाहित महिला से दुष्कर्म के आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि पीड़िता पहले से शादीशुदा है। पति से विवाह विच्छेद हुए बिना झूठा वचन देने पर किसी अन्य से शारीरिक संबंध बनाने का तथ्य स्वीकार्य नहीं है। झूठी प्राथमिकी के कारण कोर्ट को चार वर्ष तक झूठे तथ्यों पर सुनवाई करनी पड़ी।
बनबसा क्षेत्र की एक महिला ने फरवरी 2021 में पुलिस में तहरीर देकर बताया कि 2013 में उसका पति नौकरी के लिए मुंबई गया था। तब से उसके पति वापस नहीं लौटे। दो बच्चों को पालने के लिए वह खुद बनबसा में काम करने लगी थी। चांद फार्म निवासी धीरज रावत (30) ने सहानुभूति दिखाकर उससे दोस्ती की। जून 2015 में वह अपने एक दोस्त के साथ उसके कमरे में आया। धीरज का साथी तीनों के लिए लस्सी लेकर आया उसे पीकर वह बेहोश हो गई। तब आरोपी ने उससे शारीरिक संबंध बनाए और आराेपी के शादी कर साथ रखने की बात पर दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे। वह गर्भवती होती तो आरोपी गोली खिलाकर गर्भपात करवा देता। फरवरी 2020 में उसने बरेली अस्पताल में बेटे को जन्म दिया। बाद में आरोपी उसे लेकर चकरपुर ऊधम सिंह नगर चला गया। यहां वह उससे मारपीट और अन्य लोगों से संबंध बनाने के लिए दबाव बनाने लगा तो पीड़िता ने तहरीर दी।