खूनाबोहरा गांव के त्रिलोक सिंह बोहरा (52) 35 दिन बाद भी अपने घर नहीं पहुंचे। सीमांत सड़क संगठन (बीआरओ) में अरुणांचल के डिबू्रगढ़ में कुकमैन के पद में कार्यरत बोहरा 18 अक्तूबर को 15 दिन के अवकाश पर घर के लिए रवाना हुए थे।
परिजनों को अपने साथी दीपक मोहन के फोन से सूचना दी कि वह दीपक के साथ घर आ रहे हैं। उसके बाद से त्रिलोक का कोई पता नहीं चला है।
बोहरा के परिजनों ने फोन कर त्रिलोक के बारे में पता किया तो दीपक ने बताया कि वह बनारस में उतर गया था। इसके बाद त्रिलोक का बेटा प्रकाश पिता की तलाश में बनारस पहुंचा। प्रकाश ने बनारस, फैजाबाद, बाराबंकी, बरेली के जीआरपी में पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की।
घटना के दस दिन बाद इसी आशय की रिपोर्ट लोहाघाट के थाने में लिखी गई। तब से उनका कोई पता नहीं चला है। प्रकाश का कहना है कि पापा फोन नहीं रखते है। दीपक मोहन के ही फोन से बातचीत हुआ करती थी। बोहरा के परिजनों ने जिला प्रशासन से उनकी ढूंढ खोज करने की मांग की है।