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 रॉक टेस्टिंग के नतीजों के बाद शुरू होगा बांध का निर्माण

Wed, 03 Jan 2018 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
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चंपावत जिले के पंचेश्वर में रॉक टेस्टिंग के लिए चट्टानों के बीच बनाई गई सुरंग - फोटो : अमर उजाला
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 भारत और नेपाल के बीच प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना के निर्माण से पूर्व पर्यावरणीय क्लीयरेंस की औपचारिकताएं पूरी करने की कार्रवाई जारी है। पर्यावरणीय क्लीयरेंस के बाद दूसरे चरण में बांध निर्माण का कार्य शुरू होगा। हाल ही में भारत और नेपाल के इंजीनियरों की ओर से बांध के डूबे क्षेत्र का नए सिरे से सर्वेक्षण का काम पूरा कर लेने के बाद बांध निर्माण के लिए चट्टानों के परीक्षण के लिए दो और नई सुरंगें बनाई जा रही हैं। 
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केंद्र सरकार ने हरियाणा की वाप्कोस कंपनी को दो और सुरंग खोदने के लिए अधिकृत किया है। इन दिनों सुरंग खोदने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। इससे पहले खोदी गई 20 से अधिक सुरंगों से रॉक टेस्टिंग के बेहतर नतीजे नहीं निकल पाए थे। इसी के चलते अब कंपनी नए सिरे से दो सुरंगें खोदने का काम कर रही हैं। नई सुरंग खोदने का काम पूरा होने के बाद रॉक टेस्टिंग के जो नतीजे आएंगे उसके अनुसार ही आगे का काम शुरू होगा। 


एडीएम हेमंत कुमार वर्मा के अनुसार पंचेश्वर बांध के लिए नए सिरे से दो सुरंग और खोदी जा रही हैं। इनका उद्देश्य रॉक टेस्टिंग के साथ बांध के पानी को एकत्रित करने के लिए मिट्टी की क्षमता का आंकलन करना है। परीक्षण रिपोर्ट के बाद ही बांध बनाने की जगह निश्चित होगी।
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पूरी तरह से सतह से नीचे होगी विस्फोट की प्रक्रिया
चंपावत। बांध निर्माण के दौरान सुरंग बनाने के लिए विस्फोट करने की प्रक्रिया पूरी तरह से सतह से नीचे रहेगी और इसका असर जमीन के भीतर नहीं होगा। वाप्कोस कंपनी के मुख्य अभियंता एसएस गोडसे के अनुसार प्रस्तावित बांध स्थल और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण के दौरान भारी वाहनों की अत्यधिक आवाजाही रहेगी। निर्माण सामग्री ले जाने के लिए बहुत ज्यादा वाहनों का प्रयोग होगा। जिससे निपटने के लिए डीपीआर में धनराशि का प्रावधान किया गया है।


एडीएम ने किया भूमि परीक्षण स्थल का निरीक्षण
चंपावत। एडीएम हेमंत कुमार वर्मा ने अधिकारियों के साथ पंचेश्वर में प्रस्तावित बांध स्थल का दौरा किया। उन्होंने वाप्कोस कंपनी की ओर से चट्टानों की मजबूती की परख के लिए किए जा रहे भूमि स्थल का निरीक्षण भी किया। वर्तमान में दो स्थानों पर सुरंगों के माध्यम से भूमि परीक्षण का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण कार्य में लगी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ ही सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों से भी मुलाकात की।
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