नेपाल सरकार और मधेशी मोर्चा के बीच हुई सहमति के बाद वहां स्थानीय निकाय चुनाव का एक संकट टल गया है। हालांकि, विप्लव गुट अब भी स्थानीय निकाय चुनावों के बहिष्कार के मूड में है। इन चुनावों के संपन्न होने के बाद नेपाल में प्रदेश स्तर के चुनाव कराए जाएंगे।
नेपाल में सरकार और मधेशी मोर्चा के बीच कई दौर की बैठक के बाद सरकार ने मधेशी मोर्चा को स्थानीय निकाय चुनाव में भागीदारी करने के लिए राजी करा लिया है। दोनों पक्षों के बीच हुई सहमति पर मधेशियों की मांगों के अनुरूप सरकार अब 14 मई को घोषित स्थानीय निकाय चुनावों को दो चरणों में कराएगी। प्रदेश संख्या 3, 4, 6 में 14 मई को चुनाव होंगे। शेष प्रदेशों 1, 2, 5, 7 में 14 जून को चुनाव कराए जाएंगे। बता दें कि नेपाल में वर्तमान में सात प्रदेश प्रस्तावित हैं। समझौते के बाद तय किया गया कि संविधान संशोधन त्वरित तरीके से पास कराया जाएगा। इसके अलावा तराई के कुछ जिलों में स्थानीय निकाय की संख्या के संबंध में निर्वाचन आयोग से परामर्श करने, प्रदेश सीमांकन को संघीय आयोग के माध्यम से निर्धारित करने, मधेशी भाषा को राष्ट्रीय भाषा घोषित करने को भाषा आयोग के समक्ष रखने, स्थानीय निकाय संख्या स्थानीय पुनर्संरचना आयोग के समक्ष रखने पर सहमति बनी है। उक्त समझौते के बाद मधेशी मोर्चा ने अपना प्रस्तावित आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है। बैठक में प्रधान मंत्री प्रचंड के अलावा महेंद्रनगर वासी परिवहन मंत्री रमेश लेखक, राष्ट्रीय जनता पार्टी (मधेशी मोर्चा) अध्यक्ष उपेंद्र यादव, अनिल झा आदि मौजूद रहे।
वहीं, नेत्र विक्रम चंद विप्लव गुट के विरोध और चुनाव बहिष्कार के कारण आगामी स्थानीय चुनाव पर एक संकट बाकी है। बता दें कि बनबसा से लगी नेपाल सीमा पर जहां मधेशी मोर्चा का प्रभाव कम है तो वहीं विप्लव गुट खासा सक्रिय है। इससे नेपाल के आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में होने वाली गतिविधियों का प्रत्यक्ष असर सीमावर्ती क्षेत्र पर पड़ने के आसार हैं। विप्लव गुट द्वारा बंद का आह्वान किए जाने से नेपाल के महेंद्रनगर और बनबसा के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका रहेगी। इस संबंध में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने शासन-प्रशासन को अवगत कराया है।
नेपाल की तराई को मधेश प्रांत बनाने की मांग
बनबसा (चंपावत)। नेपाल में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव के बाद प्रदेश स्तर के चुनाव होने हैं। इसके बाद वहां संभावित सात प्रदेश अस्तित्व में आ जाएंगे। मधेशी मोर्चा नेपाल की लाइफ लाईन (तराई) को मधेश प्रांत बनाने के पक्षधर हैं। वे कंचनपुर से झापा तक 22 जिलों का एक अलग मधेश प्रांत बनाए जाने की मांग करते आ रहे हैं।