जिले में सीबीएसई और एनसीईआरटीई की ओर से निजी स्कूलों के व्यावसायिक गतिविधियों से परहेज को लेकर जारी की एडवाइजरी का पालन महज दिखावे के लिए किया जा रहा है। भले ही स्कूलों की ओर से अपने कैंपस में कापी किताबों की दुकानें नहीं लगाई गई हैं, लेकिन सभी स्कूलों की ओर से अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही स्कूल ड्रेस, कापी किताबें लेने की हिदायत दिए जा रहे हैं।
जिला मुख्यालय में सीबीएसई पैटर्न पर संचालित एक स्कूल के महज बीस मीटर के दायरे में कापी किताबों की दुकान संचालित हो रही है। बाजार में एनसीईआरटीई और सीबीएसई की पुस्तकों की उपलब्धता सामान्य है। बड़ी कक्षाओं की पुस्तकें उपलब्ध हैं, लेकिन कक्षा एक से लेकर पांचवीं तक में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों से अध्यापन हो रहा है। बच्चों की यूनिफार्म को लेकर भी निजी स्कूलों की ओर से अभिभावकों से निर्धारित दुकानों से ही खरीद किए जाने को कहा जा रहा है। अभी तक स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने निजी स्कूलों का निरीक्षण तक नहीं किया है न ही किसी स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में लाई गई है।
मान्यता के लिए आवेदन नहीं लेकिन दाखिले शुरू
आधुनिक शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का भ्रम फैलाने का सिलसिला जारी है। कई स्थानों में बिना स्कूलों की मान्यता के आवेदन किए हुए ही बच्चों के दाखिले किए जा रहे हैं। जबकि मान्यता की औपचारिकताएं पूरी न करने पर शिक्षा विभाग के अधिकारी 13 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर चुके हैं। जिला शिक्षाधिकारी बेसिक सत्यनारायण का कहना है कि बिना मान्यता के संचालित होने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।