राष्ट्रपति शासन के पहले दिन सोमवार को सभी जगह खूब चर्चा रही। सियासी गलियारों से लेकर कार्यालयों तक में हलचल रही। कलक्ट्रेट में सन्नाटा छाया रहा। नेता भी परिसर में कम ही नजर आए।
अलबत्ता कलक्ट्रेट में कर्मचारी मुस्तैद थे। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। कई फरियादियों ने डीएम के सम्मुख समस्याएं रखीं। वहीं जिले के राजनीतिक गलियारों में दिन भर सन्नाटा रहा। भाजपा और कांग्रेस कार्यालय चहलपहल से दूर रहे। राष्ट्रपति शासन को लेकर लोगों में चर्चा चलती रही। कई सरकारी दफ्तरों में भी काम के साथ-साथ कयासबाजी का दौर चलता रहा।
हरीश रावत सरकार केंद्र की मोदी सरकार की साजिश का शिकार बनी। रावत सरकार जनता के लिए लाभकारी तमाम योजनाओं को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही थी। मगर केंद्र ने कांग्रेस की सरकार को गिराकर लोकतंत्र का मजाक बनाया है। ऐसा कर भाजपा ने सरकार ही नहीं, प्रदेश की जनता की पीठ पर भी छुरा घोंपा है।
हेमेश खर्कवाल, विधायक, चंपावत।
प्रदेश की कांग्रेस सरकार हर रोज नई योजना का एलान कर लोगों से छलावा कर रही थी। अधिकांश योजनाओं पर न तो कोई काम हुआ और न ही लोगों को इसका कोई लाभ मिला। उल्टा सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार ने आम लोगों की कमर तोड़ दी थी। सरकार के भ्रष्टाचार से खुद कांग्रेस से जुड़े विधायक भी तंग थे। सरकार का गिरना इसी का नतीजा है।
पूरन सिंह फर्त्याल विधायक, लोहाघाट।