रोड से कटे गांवों के किसानों के साथ ही शहरी किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान नहीं है। वजह, कहीं रोड न होने से फसल शहर नहीं पहुंचती, तो कहीं बुनियादी सुविधा न होने से औने-पौने दाम पर आलू और दूसरी फसलों को बेचने की मजबूरी है। किसानों की इस बेबसी की वजहें तो कई हैं, लेकिन अगर जिले का कोल्ड स्टोर काम करने की स्थिति में होता तो किसानों की कमाई जरूर बढ़ती।
यहां से सात किमी दूर मुड़ियानी के कोल्ड स्टोर भवन का निर्माण उस वक्त हुआ जब न चंपावत जिला था और नहीं उत्तराखंड राज्य बना था। पिथौरागढ़ और मौजूदा चंपावत जिले के आलू, सेब और सिटरस उत्पादकों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए 19 नाली 7 मुट्ठी जमीन पर इसे बनाया गया था। 77.77 लाख रुपये लागत से 1995 में यह छह मंजिला कोल्ड स्टोर भवन बनकर तैयार हुआ, लेकिन भवन निर्माण के अलावा दूसरा कोई काम नहीं हुआ।
न तापमान को ठंडा करने के लिए रेफ्रिजरेशन लगा और नहीं वुडन वर्क हो सका, जिस कारण इतनी मोटी रकम खर्च होने के बाद भी दो हजार मीट्रिक टन क्षमता वाला भवन अवशीतन गृह के रूप में काम नहीं कर सका। कोल्ड स्टोर होने से किसानों को मिलने वाले फायदे नहीं मिल सके।
कभी पुलिस कर्मियों का बसेरा भी बना
कोल्ड स्टोर भवन का उपयोग सब्जी, फल आदि को स्टोर करने के लिए नहीं हो सका है। अलबत्ता इस भवन का सबसे अधिक उपयोग अल्मोड़ा की विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने किया। संस्थान ने इस इमारत का इस्तेमाल बीज और खाद्य प्रसंस्करण के लिए किया। संस्थान ने जून 2009 से मार्च 2015 तक इसका उपयोग किया। इससे पहले पुलिस और पूर्ति विभाग ने गोदाम के रूप में उपयोग किया था।
मुड़ियानी कोल्ड स्टोर भवन में रेफ्रिजरेशन और वुडन वर्क नहीं हो सका। सिर्फ सिविल वर्क ही हुआ, जिस कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, लेकिन अब सरकार इसे उपयोग लायक बनाने पर विचार कर रही है। पिछले सप्ताह इस संबंध में देहरादून में बैठक मुड़ियानी के अलावा प्रदेश के दो अन्य कोल्ड स्टोरों की स्थिति पर चर्चा भी हुई। -एचसी तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।
जिले में उत्पादित फल
फल एरिया (हेक्टेयर में) उत्पादन (एमटी में)
सिटरस फल 2226 4451
आलू 2616 4275
सेब 619 639