चंपावत। जिले का पहला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अब इतिहास बन गया है। इस अस्पताल भवन को निष्प्रयोज्य घोषित कर ढहा दिया गया है। अस्पताल का यह भवन अब सीएमओ कार्यालय में तब्दील हो गया है। इसमें बाकायदा ये कार्यालय शुरू हो गया है। इसके चलते कार्यालय को जगह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे कार्मिकों की कार्य क्षमता बेहतर होने के साथ ही अन्य कई दिक्कतों से निजात मिलेगी।
सितंबर 1997 में सृजित चंपावत जिले में पहला सीएचसी जिला मुख्यालय में अप्रैल 2001 में खुला। एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने इस अस्पताल भवन का उद्घाटन सूबे के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी ने किया था। करीब डेढ़ दशक तक जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की यह अस्पताल धुरी बना रहा।
मगर जिला अस्पताल की व्यवस्था सुधरने के बाद से इसके उपयोग में निरंतर कमी आती रही। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने इसे समाप्त करने का निर्णय लिया। नवंबर से अस्पताल के इस भवन को सीएमओ कार्यालय के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। सीएमओ डॉ. एमएस बोहरा का कहना है कि सीएमओ कार्यालय को सीएचसी भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसी भवन से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी।
सीएचसी के खत्म होने से चंपावत की स्वास्थ्य सेवा पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। अलबत्ता दो डॉक्टरों सहित कई स्वास्थ्य कर्मियों के जिला अस्पताल भेजे जाने से स्वास्थ्य सुविधा बेहतर होंगी।
- डॉ. एमएस बोहरा
सीएमओ, चंपावत।
दूसरे अस्पताल भेजे गए यहां के डॉक्टर व अन्य कर्मी
चंपावत के इस सीएचसी में डॉक्टरों सहित कुल 47 सृजित पदों में से 23 ही तैनात थे। यहां के दो डॉक्टरों को पहले ही जिला अस्पताल संबद्ध किया गया था। अब इन दोनों डॉक्टरों को स्थायी रूप से जिला अस्पताल भेज दिया गया है। फार्मेसिस्ट मुकुल राय को लोहाघाट सीएचसी में स्थानांतरित किया गया है। इसी तरह तीन स्टाफ नर्स, दो स्वास्थ्य निरीक्षिका, एक प्रवर सहायक, डार्क रूम सहायक को भी दूसरे अस्पतालों में भेज दिया गया है।
अब जिले में अकेला सीएचसी है लोहाघाट
सीएचसी के अस्पताल के रूप में काम न करने से अब जिले के अस्पतालों की संख्या में भी कमी आ गई है। अब जिले में 24 के स्थान पर कुल 23 स्वास्थ्य केंद्र रह गए हैं। वहीं अब जिले का एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहाघाट रह गया है। जिला अस्पताल के अलावा एक संयुक्त चिकित्सालय, एक महिला अस्पताल, एक टीबी क्लीनिक, दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, छह एपीएचसी, 10 राजकीय एलोपैथिक केंद्र रह गए हैं।
स्वीकृत नहीं हुआ भवन के बजट का प्रस्ताव
स्वास्थ्य व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले सीएमओ कार्यालय को अपने भवन के लिए धन नहीं मिला। कार्यालय खुलने के बाद इसे पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ऑपरेशन थिएटर वाले कुछ कमरों में चलाया गया। इसमें जगह काफी कम थी। सीएमओ कार्यालय भवन के लिए डेढ़ दशक से अनेकों बार प्रस्ताव भेजे गए, पर धन कभी भी नहीं मिला।