चंपावत। भारी-भरकम बहुमत से मार्च 2017 में बनी भाजपा सरकार ने विकास को लेकर बेशुमार घोषणाएं की हैं, लेकिन इन घोषणाओं को अमली जामा पहनाने में लापरवाही हो रही है। यहां तक कि कुल घोषणाओं में से साढ़े छह प्रतिशत घोषणाएं विलोपित (निरस्त) हो चुकी हैं। पेयजल, लोनिवि और आवास से संबंधित एक-एक अन्य घोषणाओं को भी विलोपित करने का प्रस्ताव है। इन विलोपित घोषणाओं में सबसे अहम टनकपुर में रोडवेज की केंद्रीय कार्यशाला के निर्माण को लगने वाला झटका है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चंपावत जिले के विकास से संबंधित 96 घोषणाएं की हैं। इनमें से महज 15 घोषणाएं ही पूरी हो सकी है। विलोपित छह घोषणाओं में से सबसे अहम टनकपुर रोडवेज बस कार्यशाला को उत्तराखंड की केंद्रीय कार्यशाला में बदलना है। 200 से अधिक बस बेड़े में टनकपुर क्षेत्रीय कार्यशाला में टनकपुर, लोहाघाट और पिथौरागढ़ में तीन डिपो हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम देऊ का कहना है कि क्षेत्रीय कार्यशाला के केंद्रीय कार्यशाला बनने से रोडवेज बसों का निर्माण सहित कई बड़े कार्य होते। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ते। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी मोहन अधिकारी का कहना है कि मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं को पूरा किया जा रहा है। विलोपित घोषणाएं तात्कालिक वजह से हुई है।
मुख्यमंत्री की निरस्त हो चुकीं घोषणाएं
1. टनकपुर में रोडवेज बस कार्यशाला को केंद्रीय कार्यशाला में परिवर्तित करना।
2. कठुवापाती में सिडकुल की स्थापना।
3. बाराकोट आईटीआई को आदर्श आईटीआई बनाना।
4. मायावती में अवस्थापना सुविधाओं का विकास।
5. लोहाघाट नगर में सीवर लाइन का निर्माण कार्य किया जाएगा।
6. टनकपुर-पूर्णागिरि मोटर मार्ग में जंगली जानवरों से बचाव को सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की विभिन्न घोषणाओं को पूरा करने के लिए काम किया जा रहा है। 15 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं। 20 में काम चल रहा है। 38 घोषणाओं के आगणन और प्रस्ताव के लिए बजट शासन और विभाग को भेजे गए हैं। छह घोषणाओं को अलग-अलग कारणों से विलोपित किया गया है।
- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।