पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में सीलन युक्त कमरे रोगियों की परेशानी बढ़ाने का काम कर रहे हैं। पूर्व में बारिश के दौरान कुछ जगहों पर दीवारें पानी से तर हो गई थीं। अब अस्पताल परिसर में कई कमरों में सीलन आ रही है। कमरों में सीलन आने से मरीजों के साथ स्वास्थ्य कर्मियों को भी परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल में हर रोज अलग-अलग हिस्सों से करीब 800 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां वार्डों और बरामदे में करीब 120 से अधिक मरीज भर्ती हैं। वर्ष 1967 में बने जिले के सबसे बड़े अस्पताल की सालों पुरानी बिल्डिंग बेहद जर्जर हो चुकी है। हल्की सी बारिश होने पर पानी कमरों के अंदर टपकने लगता है। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन को पानी कमरों में न फैले इसके लिए फर्श पर बर्तन रखने पड़ते हैं। बरसात बंद हो चुकी है लेकिन छत से लेकर दीवारों तक सीलन आ रही है। सीलन वार्डों से लेकर स्टाफ रूम में दिखने लगी है। ऐसे में मरीजों से लेकर वार्ड में ड्यूटी कर रहे स्टाफ को भी लिए हर समय संक्रमण का खतरा बना हुआ है। फिजियोथेरेपी कक्ष, एक्स-रे कक्ष, ईसीजी कक्ष सहित अन्य जगहों पर सीलन से दीवारों पर लगाया गया पेंट भी खराब हो चुका है।
दीवारों पर सीलन से बढ़ा करंट फैलने और संक्रमण का खतरा
पिथौरागढ़। जिला अस्पताल के बरामदे और वार्डों में छत से बरसात के पानी टपकने और दीवारों में सीलन होने से बिजली के स्विच और बोर्ड पर करंट का खतरा बना हुआ है। यही नहीं, अस्पताल में भर्ती मरीजों और ड्यूटी कर रहे स्टाफ को भी एलर्जी, त्वचा का संक्रमण, निमोनिया, वायरल इंफेक्शन, फंगस, अस्थमा, खांसी और जुकाम होने का खतरा बना है।
अस्पताल भवन की छत जर्जर हो चुकी है। निश्चत तौर पर भवन के छत की सुधारीकरण की जरूरत है। इसको लेकर शासन-प्रशासन को पत्र भेजा गया है।
डॉ. जेएस नबियाल, पीएमएस, जिला अस्पताल पिथौरागढ़